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सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!


नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी दिखाई है। सरकार का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नीति स्तर पर इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श की तैयारी की जा रही है, जिसमें तेल कंपनियों, ऑटोमोबाइल क्षेत्र और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर एक स्पष्ट रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया में ऐसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो मौजूदा ईंधन नीतियों को आगे बढ़ाते हुए एथेनॉल मिश्रण के स्तर को बढ़ा सकें और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उपयोग को आसान बना सकें।

वर्तमान में देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम लागू है। अब सरकार ऐसे वाहनों को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है जो उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रण, यहां तक कि 85 प्रतिशत तक, पर भी आसानी से चल सकें। इससे न केवल वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन में कृषि आधारित कच्चे माल का उपयोग किया जाता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अपनाना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्यों को पहले तय समय से पहले हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे इस क्षेत्र में तेजी लाई जा सके।

एथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें कच्चे माल के दायरे का विस्तार, उत्पादन के लिए कृषि क्लस्टर विकसित करना और अतिरिक्त खाद्यान्न का उपयोग शामिल है। चावल और चीनी जैसे संसाधनों का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। इसके अलावा, एथेनॉल की खरीद के लिए तय मूल्य और कर में रियायत जैसे कदम भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

यह पहल न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक स्थिरता के लिए भी लाभकारी मानी जा रही है। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के माध्यम से भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

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