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शरीर को संतुलित और मजबूत बनाता है अष्टांग नमस्कारासन, जानें सही तरीका और जरूरी लाभ


नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के लिए आयुष मंत्रालय लगातार प्रयास कर रहा है और इसी कड़ी में विभिन्न योग आसनों के लाभ और उन्हें करने की सही विधि साझा की जा रही है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण आसन है अष्टांग नमस्कारासन जो न केवल शरीर को मजबूत बनाता है बल्कि संतुलन और लचीलापन बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

अष्टांग नमस्कारासन को योग की परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है। इसे सूर्य नमस्कार का छठा चरण माना जाता है और इसे आठ अंगों वाला आसन भी कहा जाता है क्योंकि इस मुद्रा में शरीर के आठ हिस्से जमीन को स्पर्श करते हैं। इसमें दोनों हाथ दोनों घुटने दोनों पैर के अंगूठे छाती और ठोड़ी जमीन पर टिके रहते हैं जबकि शरीर का मध्य भाग ऊपर उठा रहता है।

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेटना होता है। इसके बाद ठोड़ी को जमीन पर टिकाकर पैरों को सीधा रखें और धीरे धीरे कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं। ध्यान रखें कि शरीर का संतुलन बना रहे और केवल आवश्यक अंग ही जमीन को छू रहे हों। इस स्थिति में कुछ समय तक रुककर गहरी सांस लें और फिर धीरे से अगली मुद्रा में जाएं।

अष्टांग नमस्कारासन का नियमित अभ्यास शरीर की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाता है। खासतौर पर कंधों पीठ और बाजुओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन बेहद लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह मांसपेशियों में जकड़न को कम करता है और शरीर को सक्रिय बनाए रखता है।

इसके अलावा यह आसन शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है जिससे अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। इससे थकान कम होती है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। यह आसन सांसों को नियंत्रित करने में भी मदद करता है जिससे मानसिक शांति और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार अष्टांग नमस्कारासन केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि मानसिक संतुलन के लिए भी उपयोगी है। यह व्यक्ति को धैर्य और समर्पण सिखाता है और नियमित अभ्यास से जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करता है।

हालांकि इस आसन को करते समय सही तकनीक का पालन करना बेहद जरूरी है। यदि किसी को पीठ या गर्दन से जुड़ी गंभीर समस्या है तो उन्हें इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। धीरे धीरे अभ्यास बढ़ाना चाहिए ताकि शरीर को किसी प्रकार की चोट या असहजता न हो। इस तरह अष्टांग नमस्कारासन एक सरल लेकिन प्रभावी योगासन है जो शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरह से मजबूत बनाता है और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करता है।

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