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चयन प्रक्रिया पूरी तो विवाद खत्म: ABV-IIITM मामले में जॉइनिंग के बाद जांच पर रोक


नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान में सहायक रजिस्ट्रार पद की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि जब चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी हो और उसे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की मंजूरी मिल चुकी हो, तब बार-बार जांच के दायरे में लाना न सिर्फ अनुचित है बल्कि कर्मचारी के अधिकारों का उल्लंघन भी है।

 चयन प्रक्रिया पूरी, अब विवाद खत्म
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी भी नियुक्ति को वैधानिक प्रक्रिया के तहत अंतिम रूप दिए जाने के बाद उसे अनावश्यक रूप से विवादित नहीं किया जा सकता। यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है और सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति मिल चुकी है, तो बाद में तकनीकी आधार पर उसे चुनौती देना न्यायसंगत नहीं है।

इंटरव्यू आधारित चयन को सही ठहराया
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सहायक रजिस्ट्रार पद के लिए लिखित परीक्षा केवल क्वालिफाइंग थी, जबकि अंतिम चयन इंटरव्यू के आधार पर किया गया। कोर्ट ने इसे नियमों के अनुरूप माना और कहा कि चयन प्रक्रिया में कोई गंभीर खामी सामने नहीं आई।

 किसी अभ्यर्थी ने नहीं दी चुनौती
अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि चयन प्रक्रिया के खिलाफ न तो किसी असफल उम्मीदवार ने आपत्ति जताई और न ही पक्षपात या अनियमितता का कोई ठोस प्रमाण पेश किया गया। ऐसे में बार-बार जांच बैठाना उचित नहीं है।

 SBI नौकरी छोड़कर जॉइन किया था पद
यह मामला संदीप उपाध्याय की नियुक्ति से जुड़ा है, जिन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नौकरी छोड़कर वर्ष 2019 में इस पद को जॉइन किया था। जॉइनिंग के बाद संस्थान में कुछ शिकायतों के आधार पर कई जांच समितियां बनाई गईं, जिन्होंने चयन प्रक्रिया, वेतन सुरक्षा (पे प्रोटेक्शन) और प्रोबेशन अवधि पर सवाल उठाए।

 जांच समितियों की सिफारिशों पर कोर्ट सख्त
कुछ समितियों ने नियुक्ति रद्द करने तक की सिफारिश की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इन पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि नियुक्ति के बाद इस तरह की बार-बार जांच कर्मचारी के लिए अस्थिरता पैदा करती है और यह न्यायसंगत नहीं है।

 कर्मचारियों के अधिकारों को दी प्राथमिकता
कोर्ट ने अपने फैसले में यह संदेश भी दिया कि एक बार चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारी को स्थिरता और सुरक्षा मिलनी चाहिए। बार-बार जांच से न सिर्फ संस्थान की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी गिरता है।

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