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धरती के भीतर छिपी हलचल का विज्ञान भूकंप कैसे आता है और वैज्ञानिक इसे कैसे मापते हैं समझिए पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली: हाल ही में जापान और भारत के मणिपुर में आए भूकंप के झटकों ने एक बार फिर इस प्राकृतिक घटना को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि भूकंप आखिर होता क्या है इसके पीछे का विज्ञान क्या है और वैज्ञानिक इसे किस तरह मापते हैं दरअसल भूकंप पृथ्वी की सतह पर होने वाली अचानक हलचल का परिणाम होता है जो धरती के भीतर जमा ऊर्जा के एकाएक मुक्त होने से पैदा होता है

पृथ्वी की संरचना को समझे बिना भूकंप के कारणों को पूरी तरह नहीं जाना जा सकता हमारी पृथ्वी चार मुख्य परतों से बनी है जिनमें क्रस्ट मेंटल बाहरी कोर और आंतरिक कोर शामिल हैं क्रस्ट और मेंटल का ऊपरी हिस्सा मिलकर एक कठोर परत बनाते हैं जिसे लिथोस्फीयर कहा जाता है यह लिथोस्फीयर कई बड़े हिस्सों में बंटी होती है जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है ये प्लेट्स लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं और इसी गति के कारण पृथ्वी के अंदर दबाव बनता रहता है

जब ये टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं अलग होती हैं या एक दूसरे के समानांतर खिसकती हैं तो चट्टानों में तनाव बढ़ने लगता है जब यह तनाव एक सीमा से अधिक हो जाता है तो चट्टानों में दरारें बनती हैं जिन्हें फॉल्ट लाइन कहा जाता है इसी फॉल्ट लाइन पर अचानक ऊर्जा के मुक्त होने से भूकंप उत्पन्न होता है यह ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर फैलती है जिन्हें सिस्मिक वेव्स कहा जाता है

भूकंप की शुरुआत जिस स्थान से होती है उसे अधिकेंद्र कहा जाता है और यही वह क्षेत्र होता है जहां झटके सबसे अधिक महसूस किए जाते हैं हालांकि इन सिस्मिक वेव्स का प्रभाव सैकड़ों किलोमीटर दूर तक फैल सकता है और कई बार दूरस्थ क्षेत्रों में भी नुकसान पहुंचा सकता है सिस्मिक वेव्स पृथ्वी के अंदर और सतह पर अलग अलग गति से यात्रा करती हैं और वैज्ञानिक इन्हीं तरंगों के आधार पर भूकंप का विश्लेषण करते हैं

भूकंप को मापने के लिए वैज्ञानिक सीस्मोमीटर नामक यंत्र का उपयोग करते हैं यह उपकरण धरती की हलचल को बेहद संवेदनशील तरीके से रिकॉर्ड करता है और उसे ग्राफ के रूप में प्रस्तुत करता है इन आंकड़ों के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि भूकंप की तीव्रता कितनी थी उसका केंद्र कहां था और वह कितनी गहराई में उत्पन्न हुआ

दिलचस्प तथ्य यह है कि भूकंप केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं हैं वैज्ञानिकों ने चंद्रमा और मंगल जैसे ग्रहों पर भी सिस्मिक गतिविधियों के संकेत खोजे हैं इन अध्ययनों से यह समझने में मदद मिल रही है कि अन्य ग्रहों की आंतरिक संरचना कैसी है और वहां की भूगर्भीय प्रक्रियाएं कैसे काम करती हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है इसके लिए वैज्ञानिक शोध बेहतर निर्माण तकनीक और जागरूकता बेहद जरूरी है यदि लोग भूकंप के दौरान सही सावधानियां बरतें और सुरक्षित निर्माण को अपनाएं तो जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है नई दिल्ली।

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