नई दिल्ली। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित सातवां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह अभ्यास उज्बेकिस्तान में दोनों देशों की सेनाओं के बीच रणनीतिक तालमेल और सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया। इस दौरान सैनिकों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करते हुए तेज और सटीक कार्रवाई का प्रदर्शन किया। आतंकवाद-रोधी अभियानों को केंद्र में रखते हुए विभिन्न आधुनिक सैन्य तकनीकों और रणनीतियों का गहन अभ्यास किया गया, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय और अधिक सुदृढ़ हुआ।
इस सैन्य अभ्यास में पर्वतीय और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन चलाने की विशेष ट्रेनिंग दी गई। सैनिकों ने रस्सियों के सहारे उतरने, ऊंचाई वाले इलाकों में तेजी से मूवमेंट करने और स्नाइपर ऑपरेशन जैसी जटिल चुनौतियों का सामना किया। इसके अलावा रॉकेट हमलों और जवाबी कार्रवाई का भी अभ्यास किया गया, जिससे उनकी युद्धक क्षमता और रणनीतिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। संयुक्त रूप से योजनाएं बनाकर उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने की क्षमता भी इस अभ्यास के माध्यम से विकसित हुई।
अभ्यास का एक महत्वपूर्ण पहलू अवैध सशस्त्र समूहों के खिलाफ कार्रवाई की रणनीतियों को मजबूत करना रहा। सैनिकों ने आतंकवादी ठिकानों में घुसकर कार्रवाई करने, तलाशी अभियान चलाने और छापेमारी जैसी तकनीकों का अभ्यास किया। इससे वास्तविक परिस्थितियों में संयुक्त ऑपरेशन को अधिक प्रभावी और सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इस तरह के अभ्यास से दोनों देशों की सेनाओं के बीच साथ मिलकर काम करने की क्षमता और अधिक बेहतर होती है, जिससे भविष्य में किसी भी चुनौती का सामना संयुक्त रूप से किया जा सकेगा।
समापन के अवसर पर इस अभ्यास को दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला बताया गया। ‘डस्टलिक’ ने न केवल सैन्य साझेदारी को मजबूत किया है, बल्कि भविष्य में संयुक्त मिशनों को अधिक कुशलता और प्रभावशीलता के साथ अंजाम देने की क्षमता भी विकसित की है। यह अभ्यास इस बात का संकेत है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में दोनों देश आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आपसी सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।