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फैमिली प्लानिंग पर बड़ा झटका अमेरिका की फंडिंग कटौती से लाखों महिलाओं की सेवाएं प्रभावित


वाशिंगटन । वाशिंगटन से आई एक बड़ी खबर ने वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। अमेरिका ने वर्ष 2025 और 2026 के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी फंडिंग में भारी कटौती की है जिसका सीधा असर दुनिया के कई देशों में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी यानी यूएसएआईडी द्वारा 5300 से अधिक अनुदानों और अनुबंधों को समाप्त कर दिया गया है जिससे वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस कटौती का सबसे बड़ा प्रभाव फैमिली प्लानिंग और रिप्रोडक्टिव हेल्थ सेवाओं पर पड़ा है। दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में एचआईवी संबंधित सेवाओं की फंडिंग में भी भारी कमी दर्ज की गई है जिससे वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हुई है।

सीएनएन की रिपोर्ट में दक्षिण अफ्रीका की एक नर्स केफिन ओजुंगा के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी सहायता में कटौती के बाद महिलाओं के लिए हालात काफी कठिन हो गए हैं। पहले मोबाइल क्लीनिक के जरिए मुफ्त गर्भनिरोधक सेवाएं मातृत्व जांच और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध थीं लेकिन अब फंडिंग बंद होने से ये सेवाएं बाधित हो गई हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई देशों में हेल्थकेयर वर्कर्स की नौकरियां समाप्त हो गई हैं और बर्थ कंट्रोल से जुड़ी दवाओं की भारी कमी हो गई है। इसके साथ ही सप्लाई चेन में लगातार आ रही दिक्कतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के पास स्वास्थ्य सेवाओं के बहुत सीमित विकल्प बचे हैं।

इंटरनेशनल प्लांड पेरेंटहुड फेडरेशन के अनुसार इस फंडिंग कटौती के चलते दुनिया भर में लगभग 1400 मेडिकल क्लिनिक बंद हो चुके हैं। इसके कारण अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2025 में लगभग 9 मिलियन लोगों को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना पड़ सकता है जो एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट की ओर संकेत करता है।

अमेरिकी सरकार की ओर से प्रस्तावित नए बजट में भी स्वास्थ्य क्षेत्र में और कटौती की बात कही गई है जिससे आने वाले वर्षों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार रिप्रोडक्टिव हेल्थ प्रोग्राम्स पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं और फंडिंग में अरबों डॉलर की कमी संभव है।

हालांकि यह बजट कांग्रेस की मंजूरी पर निर्भर करता है लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकताओं में बदलाव आया है जिसका असर वैश्विक स्वास्थ्य योजनाओं पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कटौती से विकासशील देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और भी कमजोर हो सकती है और महिलाओं की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

कुल मिलाकर अमेरिका की इस नीति बदलाव ने वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है और आने वाले समय में इसके व्यापक सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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