नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत में किसी फिल्म की सफलता का पैमाना अब उसकी कहानी के साथ-साथ ‘100 करोड़ क्लब’ में शामिल होने की क्षमता से मापा जाता है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘भूत बंगला’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए महज दस दिनों के भीतर 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।
इस उपलब्धि के साथ ही बॉलीवुड के खिलाड़ी कहे जाने वाले अक्षय कुमार ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसे छूना फिलहाल किसी भी समकालीन अभिनेता के लिए एक बड़ी चुनौती नजर आता है। अक्षय कुमार अब भारतीय सिनेमा के इतिहास के पहले ऐसे अभिनेता बन गए हैं, जिनकी झोली में कुल 20 फिल्में ऐसी हैं जिन्होंने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है।
बॉक्स ऑफिस पर इस ‘शतक’ वाली फिल्मों के दौर की शुरुआत साल 2008 में आमिर खान की फिल्म ‘गजनी’ से हुई थी। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि आने वाले डेढ़ दशक में यह एक मानक बन जाएगा।
अक्षय कुमार ने इस सफर में साल 2012 में ‘हाउसफुल 2’ के जरिए अपना खाता खोला था और तब से लेकर अब तक उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी हालिया सफलताओं में ‘स्काई फोर्स’, ‘हाउसफुल 5’ और ‘जॉली एलएलबी 3’ जैसी फिल्मों ने उनकी स्थिति को और भी मजबूत कर दिया है। अक्षय की सफलता का राज उनकी फिल्मों की विविधता और साल में कई प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की उनकी गति को माना जा सकता है।
इस दौड़ में दूसरे पायदान पर सलमान खान का नाम आता है, जिनके खाते में कुल 18 फिल्में 100 करोड़ क्लब का हिस्सा रही हैं। सलमान ने ‘दबंग’ और ‘बॉडीगार्ड’ जैसी फिल्मों के जरिए इस क्लब में अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी और हाल ही में ‘सिकंदर’ जैसी फिल्म ने उनकी इस गिनती को आगे बढ़ाया है।
वहीं, अजय देवगन 16 फिल्मों के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से टिके हुए हैं। अजय देवगन की ‘तानाजी’, ‘दृश्यम 2’ और ‘सिंघम’ सीरीज की फिल्मों ने उन्हें इस विशिष्ट क्लब का एक विश्वसनीय खिलाड़ी बना दिया है।
सूची में चौथे स्थान पर बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान का नाम दर्ज है। हालांकि उनकी फिल्मों की संख्या 10 है, लेकिन ‘जवान’ और ‘पठान’ जैसी फिल्मों ने जो रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है, उसने उनके स्टारडम की एक नई परिभाषा लिखी है। पांचवें स्थान पर रणवीर सिंह ने अपनी जगह पक्की की है, जिनकी कुल 9 फिल्में इस क्लब में शामिल हो चुकी हैं।
उनकी हालिया रिलीज ‘धुरंधर’ सीरीज की सफलता ने उन्हें इस एलीट लिस्ट में शामिल होने का मौका दिया। यह आंकड़े न केवल इन अभिनेताओं की लोकप्रियता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि भारतीय दर्शकों की पसंद और सिनेमाई बाजार का दायरा कितनी तेजी से बदल रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई नया चेहरा इस स्थापित क्रम को चुनौती दे पाता है।