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आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र 'गरुड़ घंटी': जानिए पूजा के दौरान इसे बजाने के पीछे छिपे गहरे रहस्य

नई दिल्ली। सनातन संस्कृति में पूजा-पाठ के दौरान घंटी बजाने का विधान सदियों पुराना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के छोटे से मंदिर में इस्तेमाल होने वाली घंटी का भी अपना एक विशेष विज्ञान और महत्व है? हिंदू परिवारों में मुख्य रूप से ‘गरुड़ घंटी’ का उपयोग किया जाता है, जिसके ऊपरी भाग पर भगवान विष्णु के वाहन और संदेशवाहक गरुड़ देव की आकृति बनी होती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गरुड़ देव को भगवान विष्णु का द्वारपाल माना गया है, इसलिए घर में इस घंटी का होना और इसे बजाना साक्षात श्रीहरि और माता लक्ष्मी को आमंत्रित करने के समान है।

धार्मिक ग्रंथों में इस विशेष घंटी की ध्वनि को ‘ब्रह्म नाद’ की संज्ञा दी गई है। माना जाता है कि जब सृष्टि का निर्माण हुआ था, तब जो पहली आवाज गूँजी थी, घंटी की ध्वनि उसी का सूक्ष्म रूप है। यही कारण है कि पूजा के दौरान इसे बजाने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और व्यक्ति का मन संसार की मोह-माया से हटकर सीधे ईश्वर की ओर केंद्रित होने लगता है।

गरुड़ घंटी बजाने से घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेज होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिन घरों में नियमित रूप से गरुड़ घंटी का नाद होता है, वहां कभी दरिद्रता का वास नहीं होता और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी घंटी बजाने के कई फायदे बताए गए हैं। घंटी से निकलने वाली विशेष तरंगें और सूक्ष्म कंपन वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, इसकी सुरीली आवाज हमारे मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को सक्रिय कर देती है, जिससे मानसिक तनाव और थकान कम होती है।

आरती के समय घंटी बजाना हमारे एकाग्रता स्तर को बढ़ाता है, जिससे भक्त पूरी तरह से पूजा में लीन हो जाता है। गरुड़ जी की उपस्थिति इस बात का भी प्रतीक है कि हमारी प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुँचाने का कार्य स्वयं उनके संदेशवाहक कर रहे हैं।

शास्त्रों के अनुसार, घंटियों के मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं। ‘गरुड़ घंटी’ का प्रयोग व्यक्तिगत पूजा और छोटे मंदिरों में किया जाता है। इसके अलावा ‘द्वार घंटी’ होती है जो घरों या मंदिरों के प्रवेश द्वार पर शुभता के लिए लगाई जाती है। ‘हाथ घंटी’ पीतल की एक गोलाकार प्लेट की तरह होती है जिसे लकड़ी के डंडे से बजाया जाता है, जबकि ‘बड़ा घंटा’ मंदिरों के विशाल प्रांगण में स्थापित किया जाता है जिसकी गूँज मीलों दूर तक सुनाई देती है।

इन सभी में गरुड़ घंटी को घर की सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सबसे उत्तम और प्रभावी माना गया है। घर में नियमित इसका प्रयोग न केवल सौभाग्य लाता है बल्कि जीवन में अनुशासन और शांति का भी संचार करता है।

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