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सड़क सुरक्षा पर हाईकोर्ट का सवाल- अवैध कट और धीमी एंबुलेंस सेवा पर मांगा जवाब

नई दिल्ली|  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए अहम सवाल खड़े किए हैं। चीफ जस्टिस Sanjeev Sachdeva और जस्टिस Vinay Saraf की डिविजन बेंच ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि जब ओला-उबर जैसी कैब सेवाएं कुछ ही मिनटों में उपलब्ध हो जाती हैं, तो आपात स्थिति में एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंचती?

कोर्ट ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एनएचएआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि यह मामला सीधे लोगों की जान से जुड़ा है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

याचिका डिंडोरी निवासी सेवानिवृत्त अधिकारी Mahavir Singh द्वारा दायर की गई है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि सड़क दुर्घटनाओं में जान बचाने के लिए ओला-उबर जैसी रियल टाइम एंबुलेंस सेवा लागू की जाए। उनका कहना है कि समय पर मेडिकल सहायता न मिलने के कारण कई जिंदगियां बचाई नहीं जा पातीं।

याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। खासतौर पर भोपाल-जबलपुर हाईवे का जिक्र करते हुए बताया गया है कि यहां डिवाइडर तोड़कर करीब 300 अवैध कट-प्वाइंट्स बना दिए गए हैं, जो लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।

कोर्ट में यह भी कहा गया कि इन अवैध कट-प्वाइंट्स के कारण न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि एंबुलेंस की आवाजाही भी प्रभावित होती है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ जाती है।

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से विस्तृत जवाब और रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई में पूरी जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस टिप्पणी के बाद अब सड़क सुरक्षा और एंबुलेंस सिस्टम को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।


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