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सिंगरौली में ब्लास्टिंग का कहर पहाड़ों से गिर रहे पत्थर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी


सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में इन दिनों ब्लास्टिंग को लेकर हालात बेहद चिंताजनक बन गए हैं जहां विकास कार्यों के नाम पर हो रही गतिविधियां अब ग्रामीणों के लिए खतरे का कारण बनती जा रही हैं। मिसिरगवा आयरन ब्लॉक में टेस्टिंग के नाम पर लगातार की जा रही ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार चितरंगी के केकराव चितावल शिवपुरवा और मिसिरगवा गांवों में इन दिनों तेज धमाकों के साथ ब्लास्टिंग की जा रही है। इन धमाकों के कारण पहाड़ियों से बड़े बड़े पत्थर टूटकर नीचे गिर रहे हैं जिससे न सिर्फ ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि राहगीरों की जान भी हर समय खतरे में बनी हुई है। कई घरों में दरारें पड़ चुकी हैं और कुछ मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चितरंगी लमसरई मुख्य मार्ग पर भी पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे आवागमन करने वाले लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बड़ा हादसा हो सकता है।

इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। युवा नेता लक्ष्मण सिंह बैस के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए साफ शब्दों में कहा कि या तो ब्लास्टिंग के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए या फिर इस काम को तत्काल बंद किया जाए।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में क्षतिग्रस्त मकानों का तुरंत मुआवजा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कंपनी और प्रशासन के बीच खुली बैठक और लोगों की जान जोखिम में डालने वाले कार्यों पर रोक शामिल है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हालांकि तहसीलदार ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन अब भी बड़ा सवाल यही है कि अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह समय रहते कदम उठाता है या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होती है।

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