मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं, जिससे उनकी सुविधा और विकल्प दोनों बढ़े हैं।
गेहूं खरीदी को सुगम बनाने के लिए सरकार ने एफएक्यू मापदंडों में भी शिथिलता दी है, ताकि अधिक से अधिक किसानों की उपज खरीदी जा सके। इसके अलावा तौल प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, नेट कनेक्शन, कूपन और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण जैसी व्यवस्थाएं भी केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई हैं। उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं, जिससे किसानों को बेहतर अनुभव मिल सके।
राज्य सरकार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है, जिसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। यह दर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से तय की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि वे स्वयं भी उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं, ताकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इस कदम से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और अधिकारियों पर बेहतर काम करने का दबाव भी रहेगा।
सरकार का यह फैसला किसानों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और उपार्जन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।