जानकारी के मुताबिक, खिड़की तोड़कर भागने के कई घंटे बाद सोमवार रात करीब 9 बजे एक लड़की ने सतना रेलवे स्टेशन से अपने चाचा को फोन किया। फोन पर उसने सिर्फ इतना कहा कि वह देहरादून जा रही है। यह कॉल जैसे ही खत्म हुआ, मामला और उलझ गया। परिजनों ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दी, लेकिन जब पुलिस ने उसी नंबर पर दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो मोबाइल बंद मिला।
इस एक कॉल ने पुलिस की जांच की दिशा बदल दी। साइबर सेल की मदद से उस नंबर को सर्विलांस पर लिया गया, जिसमें लोकेशन सतना और जबलपुर के बीच ट्रेस हुई। पुलिस के अनुसार, फरार हुई लड़कियों के पास कोई मोबाइल फोन नहीं था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कॉल किसी अन्य व्यक्ति के फोन से किया गया था। यही वजह है कि अब इस मामले में बाहरी मददगार की भूमिका की आशंका मजबूत हो गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि फरार होने के बाद तीनों किशोरियां पूरी रात एक स्कूल परिसर में छिपी रहीं। सुबह स्कूल खुलने से पहले वे वहां से निकल गईं और दिनभर शहर में इधर-उधर घूमती रहीं। इसके बाद रात में वे रेलवे स्टेशन पहुंचीं और वहां से ट्रेन पकड़ ली। इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बड़ी चूक के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले गार्ड को बर्खास्त कर दिया है। साथ ही, वन स्टॉप सेंटर की खिड़कियों को पक्की दीवार से बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो सके।
फिलहाल पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। खासतौर पर उस रहस्यमयी कॉल और मोबाइल नंबर के जरिए संभावित मददगार तक पहुंचने की कोशिश जारी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की असली कहानी सामने आने की उम्मीद है।