नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है जहां विक्रम दोराईस्वामी ने चीन में भारत के राजदूत के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने से पहले औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है उन्होंने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर अपने परिचय पत्र प्राप्त किए हैं जो किसी भी राजनयिक नियुक्ति का एक जरूरी और औपचारिक चरण माना जाता है
चीन में भारतीय दूतावास ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की और बताया कि दोराईस्वामी को उनके नए असाइनमेंट के लिए राष्ट्रपति से क्रेडेंशियल्स प्रदान किए गए हैं यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के बीच संबंध कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के चलते काफी अहम माने जा रहे हैं ऐसे में एक अनुभवी राजनयिक की तैनाती को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है
1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी का कूटनीतिक करियर बेहद समृद्ध और विविध अनुभवों से भरा रहा है उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में मास्टर डिग्री हासिल कर पूरी की इसके बाद 1992 से 1993 के दौरान नई दिल्ली में अपनी इन सर्विस ट्रेनिंग पूरी की और मई 1994 में हांगकांग स्थित भारतीय दूतावास में थर्ड सेक्रेटरी के रूप में अपनी पहली विदेशी नियुक्ति संभाली
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय से चीनी भाषा में डिप्लोमा भी किया है जो उन्हें चीन से जुड़े मामलों में एक अतिरिक्त विशेषज्ञता प्रदान करता है यही कारण है कि उन्हें पहले भी बीजिंग में भारतीय दूतावास में कार्य करने का अनुभव मिल चुका है जहां उन्होंने लगभग चार वर्षों तक अपनी सेवाएं दी थीं
इसके अलावा दोराईस्वामी ने विदेश मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है जिसमें डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल और प्रधानमंत्री कार्यालय में निजी सचिव जैसे अहम पद शामिल हैं उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन न्यूयॉर्क में राजनीतिक सलाहकार के रूप में भी काम किया और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में महावाणिज्य दूत की जिम्मेदारी भी संभाली
उनका अनुभव केवल बहुपक्षीय मंचों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने क्षेत्रीय संगठनों में भी अहम भूमिका निभाई नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने सार्क विभाग का नेतृत्व किया और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समन्वयक के रूप में भी कार्य किया
हाल के वर्षों में वे ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत रहे हैं और अब उन्हें चीन जैसे महत्वपूर्ण देश में भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ऐसे में यह नियुक्ति भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है
आने वाले समय में विक्रम दोराईस्वामी से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने अनुभव और विशेषज्ञता के जरिए भारत और चीन के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत के हितों को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे