रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी रेंज हजारों किलोमीटर तक हो सकती है। परीक्षण के बाद चीन और पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ गई है। खासतौर पर पाकिस्तान की चिंता इस बात को लेकर बताई जा रही है कि भारत अब ऐसी मिसाइल तकनीक की तरफ बढ़ रहा है, जिसे रोक पाना लगभग नामुमकिन माना जाता है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइलें इतनी तेज और एडवांस हैं कि मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए उन्हें इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है। यही वजह है कि भारत की रणनीतिक क्षमता को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि मिसाइल ने हाइपरसोनिक री-एंट्री प्रोफाइल के साथ उड़ान भरी और इसकी गति मैक-5 से ज्यादा हो सकती है। सोशल मीडिया पर बांग्लादेश और पूर्वी भारत के कई इलाकों से आसमान में तेज रफ्तार रोशनी जैसी वस्तु के वीडियो भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिसाइल की पैंतरेबाजी क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है।
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के खिलाफ इतनी लंबी दूरी की मिसाइल की जरूरत नहीं है, इसलिए इस परीक्षण का मुख्य संदेश चीन को माना जा रहा है। भारत अब ऐसी क्षमता विकसित कर रहा है, जिससे चीन के भीतर मौजूद सामरिक और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सके।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि अगर यह वास्तव में MIRV तकनीक या अग्नि-6 से जुड़ा परीक्षण है, तो यह चीन की मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। इससे भारत की ‘सटीक और तेज जवाब’ वाली सैन्य रणनीति को नई ताकत मिलेगी।