सेलिना जेटली और उनके पति पीटर हाग के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद अब एक गंभीर कानूनी स्थिति में पहुंच गया है। लंबे समय से दोनों के रिश्तों में तनाव की खबरें सामने आ रही थीं, लेकिन अब यह मामला पुलिस जांच और आपराधिक कार्रवाई तक पहुंच चुका है। अभिनेत्री की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पुलिस ने औपचारिक रूप से मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब पीटर हाग के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया। इसका मतलब है कि अब उनके देश से बाहर जाने पर रोक जैसी स्थिति बन गई है और उन्हें जांच में सहयोग करना होगा। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच के दौरान आवश्यक सहयोग नहीं मिलने के कारण यह कदम उठाया गया है। इसके बाद मामला केवल पारिवारिक विवाद से बढ़कर कानूनी जांच का रूप ले चुका है।
शिकायत में सेलिना जेटली ने अपने पति पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार शादी के दौरान उन्हें लगातार मानसिक दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर प्रताड़ित किया गया और कई बार धमकियां भी दी गईं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उन्हें काम करने से रोका गया, जिससे वे आर्थिक रूप से पूरी तरह निर्भर हो गईं।
इसके अलावा आरोपों में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता था और उन्हें बार-बार मानसिक रूप से तोड़ा गया। शिकायत के अनुसार यह व्यवहार लंबे समय तक चलता रहा, जिससे उनका निजी जीवन काफी प्रभावित हुआ।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय कानून की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की है और अब जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों के बयान और सबूतों की जांच की जा रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
दूसरी तरफ अभी तक पीटर हाग की ओर से इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और अधिक स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस जांच के चलते अब सभी संबंधित पहलुओं को खंगाला जा रहा है और दस्तावेजों की भी समीक्षा की जा रही है।
यह मामला अब केवल एक निजी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत गंभीर जांच का विषय बन चुका है। लुक आउट सर्कुलर जारी होने के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है और जांच एजेंसियां हर पहलू पर ध्यान दे रही हैं।
फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई और बयान इस विवाद की दिशा तय करेंगे। अदालत और जांच प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही यह साफ होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामला किस निष्कर्ष तक पहुंचता है।