सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद कमजोर साबित हुई, जब वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत ही लाल निशान में हुई और शुरुआती मिनटों में ही बिकवाली का दबाव इतना तेज रहा कि प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे फिसल गए। निफ्टी ने 24000 के महत्वपूर्ण स्तर को तोड़ते हुए 23900 के आसपास कारोबार शुरू किया, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया।
सुबह के सत्र में सेंसेक्स भी भारी गिरावट के साथ खुला और करीब 900 अंकों से अधिक टूट गया। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई, जिसका असर सीधे इक्विटी बाजार पर पड़ा। बाजार में हर तरफ बिकवाली का दबाव दिखाई दिया और किसी भी सेक्टर में मजबूती टिक नहीं पाई।
कारोबार के दौरान लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे। ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और मीडिया सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में भारी बिकवाली के कारण बाजार की गिरावट और गहरी हो गई। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयर भी दबाव में रहे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि कमजोरी व्यापक स्तर पर फैली हुई है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। आमतौर पर जब बड़े शेयरों में दबाव होता है तो छोटे शेयर कुछ हद तक स्थिर रहते हैं, लेकिन इस बार सभी वर्गों में समान रूप से कमजोरी रही। इससे यह संकेत मिला कि बाजार में विश्वास की कमी गहराती जा रही है और निवेशक फिलहाल सुरक्षित रुख अपना रहे हैं।
वैश्विक बाजारों में भी मिश्रित रुख रहा, लेकिन एशियाई बाजारों के कई हिस्सों में कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और राजनीतिक अस्थिरता ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, जिससे महंगाई की आशंका भी बढ़ गई है। इसी कारण निवेशकों ने इक्विटी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है।
इस गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो बड़े देशों के बीच जारी तनाव माना जा रहा है, जहां कूटनीतिक बातचीत में अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। शांति प्रस्तावों पर सहमति न बनने और रणनीतिक मुद्दों पर टकराव के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।
कुल मिलाकर, मौजूदा बाजार स्थिति यह संकेत देती है कि जब तक वैश्विक तनाव में सुधार नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। निफ्टी के लिए 24000 का स्तर अब मजबूत प्रतिरोध बन चुका है, जबकि नीचे की ओर दबाव जारी रहने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों के लिए फिलहाल यह समय सावधानी और सतर्कता का है, क्योंकि वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा को तेजी से बदल रहे हैं।