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योगी कैबिनेट विस्तार के बाद BJP के भीतर उठे असंतोष के स्वर, आशा मौर्य और बृजभूषण ने जताई नाराजगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार ने सियासी हलचल तेज कर दी है। रविवार को हुए कैबिनेट विस्तार में 2 कैबिनेट मंत्री और 4 नए राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया, जबकि दो राज्य मंत्रियों को प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार दिया गया। हालांकि विस्तार के तुरंत बाद भाजपा के भीतर नाराजगी के स्वर भी खुलकर सामने आने लगे हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन की बजाय जन भवन में आयोजित समारोह में सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

पश्चिमी यूपी और ब्राह्मण समीकरण पर फोकस
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जाट नेता भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है। वहीं रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक और समाजवादी पार्टी से भाजपा में आए मनोज पांडे को भी कैबिनेट में जगह मिली है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी एंट्री को अहम माना जा रहा है। मनोज पांडे पहले अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

इन मंत्रियों को मिला प्रमोशन
राज्य मंत्री अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को बेहतर प्रदर्शन के आधार पर स्वतंत्र प्रभार देकर पदोन्नत किया गया है।

चार नए चेहरों को मौका
योगी सरकार में चार नए राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया है। कृष्णा पासवान, जो फतेहपुर की खागा सीट से चार बार विधायक रह चुकी हैं, दलित-पासी समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं। अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेंद्र दिलेर को भी मंत्री बनाया गया है। वे वाल्मीकि समाज से आते हैं और राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं। वाराणसी में लंबे समय तक भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हंसराज विश्वकर्मा को OBC चेहरे के रूप में शामिल किया गया। कन्नौज की तिरवा सीट से विधायक कैलाश राजपूत को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

BJP के भीतर असंतोष के स्वर
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी भी सामने आई है। सीतापुर के महमूदाबाद से विधायक आशा मौर्य का नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में था, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं मिलने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि ऐसा लग रहा है जैसे पार्टी को अब मौर्य समाज की जरूरत नहीं रह गई और दलबदल कर आने वालों को प्राथमिकता दी जा रही है।

बृजभूषण शरण सिंह का तंज
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी सोशल मीडिया पर शायराना अंदाज में अपनी नाराजगी जाहिर की। माना जा रहा है कि वे अपने बेटे प्रतीक भूषण के लिए मंत्री पद की उम्मीद कर रहे थे। किसी ठाकुर चेहरे को जगह न मिलने पर उन्होंने लिखा –
“शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है,
जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है।”

अब सभी 60 मंत्री पद भर गए
91वें संविधान संशोधन के तहत उत्तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस विस्तार के बाद योगी सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 60 हो गई है। इनमें 23 कैबिनेट मंत्री, 16 स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और 21 राज्य मंत्री शामिल हैं।

जातीय और राजनीतिक समीकरण
वर्तमान मंत्रिमंडल में अब 22 सवर्ण, 25 OBC, 11 दलित, 1 मुस्लिम और 1 सिख मंत्री शामिल हैं। विधानसभा में भाजपा के 257 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास 102 विधायक हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों और अन्य पार्टियों के भी सदस्य सदन में मौजूद हैं।

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