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ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी



नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए, जिसके चलते इस बार कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। बैठक में ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिली, जिससे साझा सहमति बनाना मुश्किल हो गया। इसके बाद अध्यक्ष की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें 63 बिंदुओं के जरिए सभी देशों के विचारों को शामिल किया गया।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान ने मांग रखी थी कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की निंदा ब्रिक्स मंच से की जाए, लेकिन इस पर सभी सदस्य देश सहमत नहीं हो सके। कुछ देशों ने कहा कि किसी एक पक्ष को सीधे तौर पर निशाना बनाना कूटनीतिक संतुलन के खिलाफ होगा, जबकि अन्य देशों ने क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सख्त रुख अपनाने की वकालत की।

इसी असहमति के कारण संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन सकी। बाद में जारी अध्यक्षीय बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के विचार अलग-अलग हैं, लेकिन सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया।

बयान में यह भी कहा गया कि ब्रिक्स देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत दंडात्मक उपायों की आलोचना की है। साथ ही मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में फलस्तीन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन राज्य के समर्थन की बात दोहराई गई।

इस तरह पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण ब्रिक्स बैठक में एकजुटता की कमी दिखी, हालांकि संवाद और शांति की आवश्यकता पर सभी देशों ने सहमति व्यक्त की।

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