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सुपर सुखोई से दुश्मनों में खौफ, भारत के Su-30MKI बनेंगे 4.7 जेनरेशन के घातक फाइटर जेट




नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना अपने सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों को बड़े अपग्रेड के जरिए “सुपर सुखोई” में बदलने जा रही है। नए रडार, AI सिस्टम और ताकतवर इंजन से लैस ये विमान पाकिस्तान के F-16 और JF-17 के लिए बड़ी चुनौती बनेंगे।

भारतीय वायुसेना अब अपनी ताकत को नई ऊंचाई देने की तैयारी में जुट गई है। देश के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में शामिल Sukhoi Su-30MKI को बड़े अपग्रेड के जरिए “सुपर सुखोई” बनाया जाएगाभारतीय वायुसेना अब अपनी ताकत को नई ऊंचाई देने की तैयारी में जुट गई है। देश के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में शामिल Sukhoi Su-30MKI को बड़े अपग्रेड के जरिए “सुपर सुखोई” बनाया जाएगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के बाद भारतीय फाइटर जेट्स पहले से ज्यादा आधुनिक, घातक और हाईटेक बन जाएंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अपग्रेड के बाद ये विमान पाकिस्तान के F-16 Fighting Falcon और JF-17 Thunder लड़ाकू विमानों पर भारी पड़ेंगे।

भारतीय वायुसेना के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में रूस के साथ फ्रांस और इजरायल की तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। अपग्रेडेशन के तहत सुखोई विमानों के रडार, एवियोनिक्स, हथियार प्रणाली और इंजन को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे विमान की ऑपरेशनल लाइफ करीब 30 साल तक बढ़ जाएगी।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस अपग्रेड के बाद सुखोई Su-30MKI को 4.7 जेनरेशन क्षमता वाला फाइटर जेट माना जाएगा। इसकी सबसे बड़ी ताकत भारत में विकसित “विरूपाक्ष” AESA रडार होगा, जिसे DRDO ने तैयार किया है। यह रडार 200 किलोमीटर से ज्यादा दूरी से दुश्मन के स्टील्थ विमानों का पता लगाने में सक्षम बताया जा रहा है।

सुपर सुखोई में AI आधारित नया एवियोनिक्स सिस्टम भी लगाया जाएगा, जिससे युद्ध के दौरान पायलट को रियल टाइम डेटा और बेहतर टारगेटिंग सपोर्ट मिलेगा। पुराने डिजिटल सिस्टम की जगह अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर टेक्नोलॉजी दी जाएगी। इससे विमान की सर्वाइवल क्षमता और मारक ताकत दोनों बढ़ेंगी।

सिर्फ रडार ही नहीं, बल्कि सुखोई का इंजन भी बदला जा सकता है। मौजूदा AL-31FP इंजन की जगह ज्यादा ताकतवर AL-41F-1S इंजन लगाने पर चर्चा चल रही है। यही इंजन रूस के आधुनिक Su-35 फाइटर जेट में इस्तेमाल होता है। नए इंजन से विमान को ज्यादा स्पीड, बेहतर कंट्रोल और भारी हथियार ले जाने की क्षमता मिलेगी।

इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी HAL को दी गई है। पहले चरण में 84 सुखोई विमानों को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि बाद में करीब 200 और विमानों को आधुनिक बनाया जाएगा। उम्मीद है कि 2030 तक सुपर सुखोई पूरी तरह भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन जाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान लगातार अपने एयर फोर्स बेड़े को आधुनिक बना रहे हैं। ऐसे में भारत का सुपर सुखोई प्रोजेक्ट सिर्फ अपग्रेड नहीं, बल्कि भविष्य की एयर वॉरफेयर रणनीति का बड़ा कदम माना जा रहा है।

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