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Adhik Maas 2026: अधिकमास में करें 33 देवों का पूजन, गंगा दशहरा पर मिलेगा महापुण्य



नई दिल्ली। सनातन परंपरा में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसी दौरान गंगा दशहरा का महापर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पूजा-पाठ, स्नान, दान और भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों का स्मरण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

ज्योतिष और धर्म ग्रंथों के अनुसार, गंगा दशहरा का दस दिवसीय पर्व 17 मई 2026 से प्रारंभ होकर 26 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु गंगा स्नान, दान-पुण्य और विशेष पूजन करेंगे। निर्णयसिंधु ग्रंथ में उल्लेख मिलता है कि जब ज्येष्ठ मास में अधिकमास पड़ता है, तब गंगा दशहरा का पर्व उसी अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में मनाना शास्त्र सम्मत माना जाता है।

इस बार गंगा दशहरा 26 मई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। हस्त नक्षत्र, कन्या राशि का चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य का विशेष संयोग इस पर्व को महापुण्यकारी बना रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इसी प्रकार के योग में मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।

अधिकमास में 33 देवों की पूजा का महत्व
अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों में इस मास में भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों के पूजन और नामस्मरण का विशेष महत्व बताया गया है।

इन 33 देव स्वरूपों में विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, केशव, माधव, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, नारायण, त्रिविक्रम, वासुदेव, शेषशायी, दामोदर और श्रीपति जैसे दिव्य नाम शामिल हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन नामों का श्रद्धा से जप करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

अधिकमास में करें ये विशेष उपाय
धर्माचार्यों के अनुसार, अधिकमास में दान और सेवा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस अवधि में 33 पुए कांसे के पात्र में रखकर घी सहित ब्राह्मण को दान करने से 33 प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

इसके अलावा गंगा स्नान, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, दीपदान, अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता करने से भी विशेष पुण्य मिलता है।

क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास?
अधिकमास हर तीन वर्ष में एक बार आता है। हिंदू पंचांग में चंद्र और सौर गणना के संतुलन के लिए इसे जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब किसी मास का कोई स्वामी ग्रह नहीं होता, तब भगवान विष्णु उसे अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास का दर्जा देते हैं। इसी कारण यह महीना भक्ति, तप और दान के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।

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