CBI की जांच के मुताबिक, कुलकर्णी मूल रूप से महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले हैं और एक समय में NTA से जुड़े हुए थे, जहां उन्हें परीक्षा प्रक्रिया और प्रश्नपत्र निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारी मिली हुई थी। इसी कारण उनकी पहुंच सीधे फाइनल परीक्षा पेपर तक थी।
जांच एजेंसियों का दावा है कि कुलकर्णी ने इस संवेदनशील जानकारी का गलत इस्तेमाल किया और परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्रों को एक संगठित नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने पुणे और आसपास के इलाकों में गुप्त कोचिंग क्लासेस का आयोजन किया, जहां चयनित छात्रों को परीक्षा से पहले ही ‘लीक हुए प्रश्न’ पढ़ाए जाते थे।
इसी नेटवर्क के खुलासे के बाद CBI ने कार्रवाई तेज करते हुए उन्हें जयपुर से गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ यह भी आरोप है कि वह इस पूरे ऑपरेशन में “मास्टरमाइंड” की भूमिका निभा रहे थे और कई अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर यह रैकेट चला रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक पूरा नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें कोचिंग सेंटर संचालक और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल एजेंसी ने कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है।
इस खुलासे के बाद परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
CBI अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का दायरा कितना बड़ा था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।