इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल-डीजल के दामों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। लगातार बढ़ते दामों के बाद अब भोपाल में पेट्रोल की कीमत 110.75 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.91 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इंदौर और जबलपुर में भी कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि उज्जैन में पेट्रोल 111 रुपये के पार पहुंच चुका है।
दूसरी ओर, छिंदवाड़ा जिले में ईंधन संकट और आपूर्ति दबाव को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। यहां पेट्रोल पंपों पर खरीद की सीमा तय कर दी गई है। दोपहिया वाहनों को अधिकतम 200 रुपये तक और छोटी कारों को 500 रुपये तक ही पेट्रोल दिया जा रहा है। वहीं बड़ी गाड़ियों के लिए भी फ्यूल लिमिट तय कर दी गई है। तेल कंपनियों की ऑनलाइन निगरानी के चलते तय सीमा से अधिक बिक्री पर मशीन लॉक होने की चेतावनी दी गई है।
इसी बीच उज्जैन में एक अलग ही पहल देखने को मिली, जहां एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान कथावाचक ने श्रद्धालुओं को पेट्रोल-डीजल की बचत और पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने लोगों से सप्ताह में कम से कम एक दिन निजी वाहनों के बजाय साइकिल या ई-वाहन का उपयोग करने की अपील की।
बढ़ते ईंधन दामों का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी पड़ने की आशंका है। ट्रक भाड़ा बढ़ने से सब्जियां, फल और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। साथ ही किसानों की उत्पादन लागत और बस-ऑटो किराए में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज उछाल इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह है। वैश्विक तनाव और सप्लाई बाधाओं के चलते क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं, जिससे भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ है।
सरकारी तेल कंपनियों को हर महीने हजारों करोड़ रुपये के घाटे का सामना करना पड़ रहा है, जिसे संतुलित करने के लिए कीमतों में संशोधन किया जा रहा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक बाजार की हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है।
कुल मिलाकर, ईंधन की बढ़ती कीमतें आने वाले दिनों में महंगाई की रफ्तार और तेज कर सकती हैं, जिससे आम जनता की जेब पर और दबाव बढ़ने की आशंका है।