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‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से बदल सकता है देश का आर्थिक भविष्य, 7 लाख करोड़ बचत और GDP में बढ़ोतरी का दावा

नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक और आर्थिक दावा सामने आया है। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष ने कहा है कि यदि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं तो देश को भारी वित्तीय लाभ हो सकता है। उनके अनुसार इस कदम से करीब सात लाख करोड़ रुपये तक की संभावित बचत हो सकती है, जिसका उपयोग देश के विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जा सकता है।

समिति अध्यक्ष का कहना है कि बार-बार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक मशीनरी पर भारी दबाव पड़ता है और कई बार विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं। यदि चुनाव एक साथ कराए जाएं तो न केवल संसाधनों की बचत होगी बल्कि सरकारों को नीति निर्माण और विकास कार्यों पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और सकल घरेलू उत्पाद में भी बढ़ोतरी संभव है।

बैठक के दौरान विभिन्न विभागों और अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कई आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार किया गया। समिति ने यह भी निर्देश दिया है कि इस विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए, जिसमें उद्योग, रोजगार, पर्यटन, शिक्षा और जीएसटी संग्रह जैसे क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का गहन विश्लेषण शामिल हो।

समिति अध्यक्ष ने कहा कि यह रिपोर्ट भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल के रूप में काम कर सकती है। उनका मानना है कि यदि सभी राज्यों से एक समान प्रारूप में सुझाव प्राप्त होते हैं तो नीति निर्माण और अधिक प्रभावी हो सकेगा। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि इस प्रक्रिया में कई राज्यों का दौरा किया जा चुका है और विभिन्न स्तरों पर राय ली जा रही है।

इस प्रस्ताव को लेकर सरकार का रुख यह है कि लगातार चुनावी माहौल के कारण प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है और नीति लागू करने की गति धीमी पड़ जाती है। इसलिए एक साथ चुनाव कराने का विचार शासन व्यवस्था को अधिक स्थिर और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालांकि इस प्रस्ताव पर राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर व्यापक चर्चा जारी है और सभी पक्षों की सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। समिति का कहना है कि अंतिम सिफारिश सभी हितधारकों की राय को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी ताकि यह सुधार देश के व्यापक हित में साबित हो सके।

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