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ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: विकास नहीं, भ्रष्टाचार के आरोप, चार तहसीलदार हटाए गए


नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पलवा गांव में मंगलवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब जिले के कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, एसडीएम और तहसीलदारों का काफिला निरीक्षण के लिए गांव पहुंचा। जैसे ही अधिकारी गांव की बदहाल सड़कों और जलभराव वाले इलाकों में पहुंचे, ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।

ग्रामीणों ने मौके पर ही प्रशासनिक अमले को घेर लिया और विकास कार्यों में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया। लोगों का कहना था कि गांव में सड़कें, नालियां और जल निकासी की व्यवस्था सिर्फ कागजों में पूरी दिखाई जाती है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद गांव की हालत बदतर बनी हुई है। जगह-जगह कीचड़, गंदा पानी और टूटी सड़कों ने आम जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है।

कीचड़ में फंसी अफसरों की गाड़ियां, बढ़ा गुस्सा
निरीक्षण के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब अधिकारियों के वाहन दलदल जैसी सड़कों में फंस गए। काफी मशक्कत के बाद गाड़ियों को बाहर निकाला गया, लेकिन यह दृश्य ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का गया। लोगों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां गांव में सुरक्षित नहीं चल पा रहीं, तो बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की हालत कितनी खराब होगी। ग्रामीणों ने कहा कि बारिश के मौसम में स्थिति और भयावह हो जाती है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों ने सरपंच और सहायक सचिव सहित स्थानीय अधिकारियों पर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उनका कहना था कि नालियों का निर्माण बेहद घटिया गुणवत्ता का हुआ है, जिससे पानी सड़कों पर भर जाता है। ग्रामीणों ने मांग की कि पूरे विकास कार्यों की उच्चस्तरीय वित्तीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

कलेक्टर ने लिया एक्शन, 4 तहसीलदारों के तबादले
घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत सख्त कदम उठाए। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने रात में ही चार तहसीलदारों के स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए। इसमें शहपुरा तहसील से जुड़े अधिकारियों के पदस्थापना परिवर्तन शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्यों की समीक्षा की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर आगे भी कार्रवाई होगी।

पलवा गांव की यह घटना एक बार फिर ग्रामीण विकास योजनाओं की जमीनी सच्चाई को उजागर करती है। जहां एक ओर कागजों में विकास दिखता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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