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नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद


बुरहानपुर/मध्यप्रदेश। जिले में ऑनलाइन दवा बिक्री और कथित नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई के विरोध में बुधवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुरहानपुर जिले में 500 से अधिक मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम जनता को दवाइयों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सुबह से ही कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे और मरीज दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। दोपहर होते-होते बड़ी संख्या में दवा विक्रेता बाइक रैली के रूप में एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दवाओं की अनियंत्रित बिक्री हो रही है, जिससे न केवल छोटे व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। एसोसिएशन के सचिव शरद जैन ने बताया कि जिले की सभी प्रमुख दवा दुकानें बंद रहीं और यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

ज्ञापन में केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू जीएसआर 817(E) और जीएसआर 220(E) नियमों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इनका दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों के चलते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की निगरानी कमजोर पड़ रही है और इसी का फायदा उठाकर कुछ अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं।

केमिस्टों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और गर्भपात किट (अबॉर्शन किट) की अनियंत्रित सप्लाई बढ़ रही है, जिससे युवा वर्ग में नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा सप्लाई पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और मौजूदा नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए।

इसी तरह नेपानगर क्षेत्र में भी अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर मेडिकल स्टोर बंद रहे। वहां के दवा विक्रेताओं ने भी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

नेपा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद चौहान ने कहा कि बिना नियंत्रण के हो रही ऑनलाइन दवा बिक्री से मरीजों को गलत या कम गुणवत्ता वाली दवाएं मिल रही हैं, जिससे इलाज पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

हालांकि, इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा असर आम मरीजों पर पड़ा, जिन्हें दिनभर दवाओं के लिए परेशान होना पड़ा। ग्रामीण और जरूरतमंद मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए।

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