सरकारी स्तर पर यह आश्वासन पहले ही दिया गया था कि परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी परिवार से मुलाकात के दौरान यह संकेत दिए थे कि जरूरत पड़ने पर मामले की जांच उच्च स्तरीय एजेंसी को सौंपी जा सकती है। वहीं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी लगातार CBI जांच की मांग उठाई थी।
इधर, मामले में आरोपी बनाए गए समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। हालांकि आज की सुनवाई में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने केस डायरी पेश करने के लिए समय की मांग की, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई को 2:30 बजे तक स्थगित कर दिया। यह मामला जस्टिस ए.के. सिंह की समर वेकेशन बेंच में सुना जा रहा है।
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने इस पूरे मामले में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि समर्थ सिंह पहले सरकार में लीगल एडवाइजर के रूप में काम कर चुका है और केस को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कटारा हिल्स थाना प्रभारी को हटाने की मांग भी की है।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस शुरुआती जांच में निष्पक्ष नहीं रही और कई प्रक्रियात्मक खामियां रहीं। शव के सुपुर्दगी पत्र पर जबरन साइन कराने और एफआईआर दर्ज करने में देरी जैसे आरोप भी सामने आए हैं। परिजनों का कहना है कि वे दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग पर अड़े हुए हैं और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
परिवार के सदस्य लगातार यह भी दावा कर रहे हैं कि घटनास्थल को सुरक्षित नहीं रखा गया, जिससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ती है। वहीं समर्थ पक्ष के वकील का कहना है कि पति-पत्नी के संबंध सामान्य थे और किसी बड़े विवाद की पुष्टि नहीं होती।
इस बीच मामले से जुड़े कुछ CCTV फुटेज भी सामने आए हैं, जिनमें ट्विशा को घटना से पहले छत पर जाते और बाद में कुछ लोगों द्वारा नीचे लाया जाता देखा गया है। इन वीडियो ने केस को और जटिल बना दिया है।
अब CBI जांच की मंजूरी के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है और सभी की नजरें आगे की कानूनी और जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं।