नई दिल्ली । अक्सर जब हम कोई नई हॉरर फिल्म देखने बैठते हैं, तो सबसे पहले उसकी IMDb रेटिंग चेक करते हैं। अगर रेटिंग 6 या 6.5 के आसपास हो, तो हम मान लेते हैं कि फिल्म ठीक ठाक होगी और उसे स्किप कर देते हैं। लेकिन हॉरर जॉनर के साथ ऐसा करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।सिनेमा लवर्स सोशल मीडिया पर ऐसी तीन फिल्में रीकमंड कर रहे हैं जिनकी रेटिंग कम है, लेकिन डर के मामले में बेस्ट है। ये फिल्में लोगों के पसीने छुड़ा दे रही हैं। आइए आपको बताते हैं कि इन तीन फिल्मों की खास बात क्या है।
द टेकिंग ऑफ डेबोरा लोगान (The Taking of Deborah Logan)
क्यों देखें ये फिल्म?: अगर आपको लगता है कि आपने सबकुछ देख लिया है और अब आपको डर नहीं लगता, तो ये फिल्म आपका भ्रम तोड़ देगी। ये फिल्म ‘फाउंड फुटेज’ स्टाइल में बनी है, जिससे स्क्रीन पर दिखने वाली हर घटना एकदम असली महसूस होती है।
कहानी और डर का फैक्टर: कहानी एक मेडिकल टीम की है जो अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित एक बुजुर्ग महिला पर डॉक्यूमेंट्री बना रही है। शुरुआत में ये एक इमोशनल लगती है, लेकिन धीरे-धीरे अल्जाइमर पेशेंट की हरकतें इतनी अजीब और खौफनाक होने लगती हैं कि पूरी टीम की जान पर बन आती है।
लोग क्या बोल रहे: सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि फिल्म का आखिरी का 20 मिनट का एक सीन इतना भयानक और डिस्टर्बिंग है कि कमजोर दिल वाले उसे झेल नहीं पाएंगे।
2. द डार्क एंड द विक्ड (The Dark and The Wicked)
क्यों देखें ये फिल्म?: यह कोई आम भूतिया फिल्म नहीं है जहां अचानक कोई सामने आकर आपको डराए, बल्कि ये एक ऐसी साइकोलॉजिकल हॉरर फिल्म है जो आपके दिमाग से खेलती है।
कहानी और डर का फैक्टर: इस फिल्म में दो भाई-बहन की कहानी दिखाई गई है जो अपने बीमार पिता की देखभाल करने के लिए एक बेहद सुनसान फार्महाउस पर जाते हैं। वहां पहुंचते ही उन्हें महसूस होता है कि कोई बेहद खतरनाक ताकत उनके पूरे परिवार को खत्म करना चाहती है।
लोग क्या बोल रहे: लोग कह रहे हैं कि ये फिल्म थोड़ी स्लो है, जिसकी वजह से इसकी रेटिंग कम रह गई। हालांकि हॉरर फिल्में देखने वालों के लिए ये मास्टरपीस है।
यहां देखिए फिल्म का ट्रेलर
क्यों देखें ये फिल्म?: थाईलैंड के काले जादू, ओझा और अंधविश्वास पर बनी ये फिल्म रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। इसे मॉक्युमेंट्री स्टाइल में शूट किया गया है यानी आपको ऐसा लगेगा जैसे आप कोई असली घटना लाइव देख रहे हैं।
कहानी और डर का फैक्टर: ये फिल्म थाईलैंड के एक छोटे से गांव की कहानी है, जहां एक लड़की पर किसी प्राचीन और बहुत ही दुष्ट आत्मा का साया आ जाता है। फिल्म का पहला पार्ट धीरे-धीरे सस्पेंस बनाता है, लेकिन सेकेंड हाफ और इसका क्लाइमेक्स इतना ज्यादा खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि इसे अकेले या अंधेरे में देखने की गलती बिल्कुल न करें।