भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले निकाली गई यह आक्रोश रैली दोपहर 2 बजे शुरू हुई। प्रदर्शनकारी कर्मचारी नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश को तुरंत रद्द कर उनकी बहाली की मांग की गई।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पेसा कानून और विभिन्न सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसके बावजूद सरकार ने अचानक उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। उनका कहना है कि वे पिछले पांच वर्षों से मात्र 4000 रुपये मासिक वेतन पर कार्य कर रहे थे और अब उन्हें बेरोजगार कर दिया गया है।
प्रदर्शन के दौरान भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने भी सरकार पर नाराजगी जताई। संगठन के नेताओं ने कहा कि पेसा मोबिलाइजरों ने ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं को लागू करने में अहम योगदान दिया है, लेकिन उनके साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया गया है।
कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर सेवा समाप्ति आदेश वापस लेकर बहाली नहीं की गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद वे भोपाल कूच करेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
प्रदर्शन में नरेंद्र पटेल, अपर्णा बैरागी और पुनीत तारे सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल रहे। भीषण गर्मी के बावजूद कर्मचारियों का आक्रोश कम नहीं हुआ और वे लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।