निर्देशक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि माइकल जैक्सन के काम ने उनके जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। उन्होंने कहा कि 1984 में विजयवाड़ा में एक छोटे से अंधेरे वीडियो पार्लर में पहली बार उन्होंने माइकल का प्रसिद्ध म्यूजिक वीडियो देखा था। उस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वह केवल एक गाना या प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक असाधारण ऊर्जा और कला का विस्फोट था, जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उनके अनुसार माइकल की स्टेज प्रेजेंस, डांस और संगीत की शक्ति इतनी प्रभावशाली थी कि वह किसी अलौकिक अनुभव जैसी लगती थी।
राम गोपाल वर्मा ने यह भी कहा कि माइकल जैक्सन के कई गाने और वीडियो उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। “बीट इट”, “बिली जीन”, “स्मूथ क्रिमिनल” और “ब्लैक ऑर व्हाइट” जैसे गीत उनके लिए केवल संगीत नहीं बल्कि एक तरह की कला की पाठशाला जैसे थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपने फिल्मी करियर में उन्होंने कई बार माइकल की शैली और प्रस्तुति से प्रेरणा ली।
हालांकि, उनके बयान का सबसे भावुक हिस्सा वह था जब उन्होंने माइकल जैक्सन की मृत्यु को याद किया। उन्होंने बताया कि 25 जून 2009 की सुबह जब उन्होंने समाचार देखा कि माइकल अब नहीं रहे, तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। यह खबर उनके लिए बेहद सदमे वाली थी और उन्होंने इसे एक बुरे सपने जैसा महसूस किया। लंबे समय तक यह खबर उनके मन को विचलित करती रही।
वर्मा ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि वे माइकल जैक्सन से ‘नफरत’ करते हैं, लेकिन यह नफरत किसी नकारात्मक भावना से नहीं बल्कि उस दर्द से जुड़ी है जो उनकी मृत्यु ने उन्हें दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि माइकल भी एक सामान्य इंसान थे, जिनका दिल रुक सकता था और जिन्हें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत थी। यही वास्तविकता उन्हें सबसे ज्यादा आहत करती है।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि माइकल के प्रति उनका सम्मान और प्रेम इतना गहरा है कि उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार माइकल जैक्सन आज भी अपने संगीत और कला के माध्यम से जीवित हैं और शायद किसी अलग आकाशीय दुनिया में अपनी अनोखी “मूनवॉक” जारी रखे हुए हैं।