पीड़ितों के अनुसार असलम और उसकी पत्नी अबला सुल्ताना उर्फ नंदा ने लोगों को कम समय में रकम दोगुनी होने का भरोसा दिलाया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान कर उनका विश्वास जीता गया, जिससे क्षेत्र के अन्य लोग भी इस योजना से जुड़ते चले गए। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी निवेश कर दी। आरोप है कि बाद में जब निवेशकों ने अपनी राशि वापस मांगनी शुरू की तो आरोपियों ने टालमटोल करना शुरू कर दिया और फिर संपर्क से बाहर हो गए।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस कथित ठगी से करीब 200 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। कई परिवारों ने वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई बचत निवेश की थी, जबकि कुछ लोगों ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर भी रकम लगाई थी। आरोपियों के कथित रूप से फरार होने के बाद अब इन परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
पीड़ित असलम अंसारी ने बताया कि दंपती ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाया था। शुरुआती दौर में कुछ लोगों को भुगतान मिलने से लोगों का भरोसा बढ़ गया और अधिक लोग निवेश करने लगे। हालांकि बाद में रकम वापस मांगने पर उन्हें लगातार आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आरोपियों के गायब होने की बात सामने आई।
एक अन्य पीड़िता जन्नत खान ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्षों की बचत इस योजना में निवेश की थी। उनके कहने पर परिवार के अन्य सदस्यों ने भी रकम लगाई थी। अब न तो पैसा वापस मिल रहा है और न ही आरोपियों के बारे में कोई जानकारी मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खोने के कारण गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं।
प्रदर्शन के दौरान पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने तथा निवेशकों की राशि वापस दिलाने की मांग की। कई महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि कथित ठगी के कारण उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है।
मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच की जाएगी और तथ्यों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से पीड़ितों को जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
फिलहाल पीड़ितों का कहना है कि जब तक आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती और उनकी राशि वापस दिलाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। मामले की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।