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तीन गोलियां लगने के बाद भी डटे रहे मोर्चे पर: लश्कर आतंकी को ढेर करने वाले सीआरपीएफ जवान संजय तिवारी का रीवा में भव्य स्वागत


मध्यप्रदेश। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किए जाने के बाद सीआरपीएफ जवान संजय तिवारी बुधवार को अपने गृह जिले रीवा पहुंचे, जहां उनका भव्य और भावनात्मक स्वागत किया गया। सिरमौर तहसील के डेलही गांव निवासी संजय तिवारी के सम्मान में रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूल-मालाओं की बारिश और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच विंध्य के इस वीर सपूत का अभिनंदन किया गया।

संजय तिवारी को यह प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान दिखाए गए अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रदान किया गया है। सुरक्षा बलों को एक विशेष अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। अभियान के दौरान आतंकियों ने अचानक सुरक्षा बलों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिससे स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई।

मुठभेड़ के दौरान संजय तिवारी अग्रिम हमला दल का हिस्सा थे। भारी गोलीबारी के बीच उन्होंने साहसपूर्वक आगे बढ़ते हुए मोर्चा संभाले रखा। इस दौरान उनके बांह, घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों में तीन गोलियां लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी पोजीशन नहीं छोड़ी और जवाबी कार्रवाई जारी रखी। उनके साहस और दृढ़ संकल्प के चलते एक आतंकी को मार गिराने में सफलता मिली।

रीवा पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में संजय तिवारी ने कहा कि उनके लिए देश सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ के दौरान लगी चोटों की उन्हें कोई चिंता नहीं थी। उनका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि आतंकी किसी भी हालत में बचकर न निकल पाए। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई उनके कर्तव्य का हिस्सा है और इसी भावना के साथ उन्होंने अभियान को अंजाम दिया।

संजय तिवारी की इस उपलब्धि पर पूरे विंध्य क्षेत्र में गर्व का माहौल है। उनके स्वागत के लिए स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या स्टेशन पहुंची। लोगों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया और उनके साहस को राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

इस अवसर पर सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि संजय तिवारी ने अपने शौर्य, साहस और समर्पण से न केवल रीवा और विंध्य क्षेत्र, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि तीन गोलियां लगने के बावजूद जिस तरह संजय ने मोर्चा संभाले रखा, वह देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह साबित करता है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हमारे जवान किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं।

संजय तिवारी की वीरता की यह कहानी केवल एक सैनिक के साहस का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की उस भावना को भी दर्शाती है, जो भारतीय सुरक्षा बलों को दुनिया की सबसे सक्षम और सम्मानित सेनाओं में शामिल करती है। रीवा की धरती अपने इस वीर पुत्र की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रही है।

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