कांग्रेस का यह धरना करीब पांच घंटे तक चला। इस दौरान पार्टी नेताओं ने नामांकन पत्र निरस्त किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि राज्यसभा चुनाव जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक कदम प्रतीत होता है।
धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मुकाबले से बाहर करने के उद्देश्य से साजिश रची गई है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया किसी भी प्रकार के पक्षपात या दबाव से मुक्त होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि नामांकन पत्र निरस्त होने की घटना लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का एक “काला दिन” बताते हुए कहा कि यदि ऐसी घटनाओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय मानती है।
धरने में शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रयास गौतम सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी और इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएगी। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने और पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा की मांग भी उठाई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और प्रशासन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक अपनी आपत्तियां पहुंचाने का प्रयास किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना जनता और राजनीतिक दलों का संवैधानिक अधिकार है तथा वे इसी अधिकार के तहत अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
फिलहाल राज्यसभा चुनाव और नामांकन विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में और भी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। वहीं कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को लेकर अपना विरोध आगे भी जारी रखेगी।