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सोने की चमक पड़ी फीकी! गोल्ड ETF में टूटा लगातार निवेश का सिलसिला, निवेशकों ने की मुनाफावसूली

नई दिल्ली । सोने में निवेश को लेकर निवेशकों का रुख मई महीने में बदलता दिखाई दिया है। लगातार 13 महीनों तक मजबूत निवेश आकर्षित करने वाले गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से मई 2026 में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके साथ ही एक वर्ष से अधिक समय से जारी सकारात्मक निवेश प्रवाह का सिलसिला टूट गया। वित्तीय बाजार के विशेषज्ञ इस बदलाव को निवेशकों की रणनीति में आए परिवर्तन और सोने की ऊंची कीमतों से जोड़कर देख रहे हैं।

हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग के कारण सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई थी। इसी वजह से गोल्ड ईटीएफ में भी निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई थी। हालांकि मई में पहली बार ऐसी स्थिति सामने आई जब निवेशकों ने इस श्रेणी से बड़ी मात्रा में धन निकालना शुरू किया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने और मुनाफा सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। जब किसी एसेट में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है, तब निवेशक अक्सर अपने निवेश का एक हिस्सा निकालकर लाभ सुरक्षित करते हैं। गोल्ड ईटीएफ में आई निकासी को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

बाजार जानकारों के अनुसार, हाल के महीनों में इक्विटी बाजारों में भी निवेश के अवसर बढ़े हैं। कई शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपने धन का कुछ हिस्सा सोने से निकालकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर स्थानांतरित करना शुरू किया है। इससे गोल्ड ईटीएफ में निवेश की रफ्तार स्वाभाविक रूप से धीमी हुई है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि निवेशकों के लिए सोने में निवेश बनाए रखने की अवसर लागत बढ़ी है। फिक्स्ड इनकम निवेश विकल्पों पर बेहतर प्रतिफल मिलने और अन्य परिसंपत्तियों में संभावित अवसर दिखाई देने के कारण कुछ निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ से दूरी बनानी शुरू की। इसके अलावा, बाजार में भविष्य के रिटर्न को लेकर अधिक संतुलित दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है।

हालांकि मई में निकासी दर्ज की गई, लेकिन यह तस्वीर का केवल एक पक्ष है। दूसरी ओर गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट लगातार बढ़ता रहा। इसका अर्थ यह है कि सोने की कीमतों में वृद्धि का असर फंडों की कुल परिसंपत्तियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई दिया। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि निवेश की गति में अस्थायी बदलाव देखने को मिला है।

वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि सोना अब भी निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के दौर में निवेशक इसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं। इसलिए अल्पकालिक निकासी को दीर्घकालिक रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मई के आंकड़े यह जरूर संकेत देते हैं कि निवेशक अब अधिक सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। वे केवल सुरक्षित निवेश पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न परिसंपत्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में सोने की कीमतों, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार के रुझानों के आधार पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश की दिशा तय होगी।

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