HIGHLIGHTS:
- बाल श्रम मुक्त समाज का आह्वान
- बच्चों के हाथों में किताबें हों: CM
- शिक्षा हर बच्चे का अधिकार
- बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता जरूरी
- समाज से सहयोग की अपील

World Day Against Child Labour: भोपाल। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और खिलोने होने चाहिए उस उम्र में देश के कई बच्चे बाल श्रम जैसी समस्याओं का सामना कर रहें हैं। आज विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से बाल श्रम मुक्त समाज बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। उन्होंने ने कहा कि बच्चों के माथे पर बोझ अच्छा नहीं लगता, उनके हाथों में कलम और किताब ही शोभा देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और बाल श्रम को जड़ से खत्म करने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।
बच्चों के माथे पर बोझ अच्छा नहीं लगता है। खुशहाल बचपन और शिक्षा उनका अधिकार है।
‘विश्व बालश्रम निषेध दिवस’ पर संकल्प लें कि बच्चों के हाथों में कलम-किताब ही देंगे और बाल श्रम से मुक्त समाज बनाएंगे।
हमारी सरकार बच्चों के हितों और शिक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। pic.twitter.com/yL1jb88I7E
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 12, 2026
भारत में अब भी चुनौती
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 5 से 14 वर्ष आयु वर्ग के करीब 1.01 करोड़ बच्चे काम करते पाए गए थे। वहीं, ILO की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में करीब 13.8 करोड़ बच्चे आज भी बाल श्रम में लगे हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी बाल श्रम के प्रमुख कारण हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूलों से जोड़ना और उनके परिवारों को जागरूक बनाना इस समस्या के समाधान की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि बच्चों को मजदूरी नहीं, बल्कि उनके सपनों को पूरा करने का अवसर दें। हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन मिलना चाहिए, तभी एक बेहतर और विकसित समाज का निर्माण संभव होगा।