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एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन: ढाई साल में 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव, अब अगले ढाई साल में 4500 करोड़ देने का लक्ष्य


मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में 900 उद्योग इकाइयों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 360 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। इसके साथ ही 31 मार्च 2026 तक लंबित सभी पात्र देनदारियों का भी निराकरण कर दिया गया। कुछ उद्योगों को विशेष सहायता के तहत मंडी शुल्क और बिजली अनुदान का लाभ भी दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले ढाई वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र को 4500 करोड़ रुपए का इंसेंटिव उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है और सरकार इसकी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं, जिनके माध्यम से सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 4 लाख 41 हजार से ज्यादा इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं, जो प्रदेश में महिला उद्यमिता की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और अवसर उपलब्ध करा रही है।

कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले ढाई वर्षों के दौरान राज्य में 30 नए औद्योगिक क्षेत्रों और 14 औद्योगिक क्लस्टरों को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 1063 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी किया जा चुका है। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 7400 से अधिक स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें से 3400 से अधिक का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह संख्या कुल स्टार्टअप्स का लगभग 50 प्रतिशत है, जो महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है।

एमएसएमई मंत्री Chaitanya Kashyap और प्रमुख सचिव Raghvendra Singh ने बताया कि वर्तमान सरकार के पिछले ढाई वर्षों में उद्योगों को 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया गया है। इसके मुकाबले इससे पहले के ढाई वर्षों में यह राशि केवल 1245 करोड़ रुपए थी। यानी प्रोत्साहन राशि में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 तक प्रदेश में एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों के लक्ष्य की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर जिले में उद्योग और हर परिवार में रोजगार सुनिश्चित करना है। इस दिशा में अगले ढाई से तीन वर्षों में 5000 नए औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार अब तक 76 विधानसभा क्षेत्रों में एमएसएमई सेंटर स्थापित करने के लिए स्थानों का चयन भी किया जा चुका है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सागर जिले के केसली में आयोजित लाडली बहना सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जहां उन्होंने लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त के रूप में 1.25 करोड़ हितग्राहियों के खातों में 1835 करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित की। साथ ही 190.85 करोड़ रुपए लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया गया।

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