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कच्चे तेल में गिरावट से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल, IOC–BPCL–HPCL में तेजी

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट का सीधा असर भारतीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों पर देखने को मिला है। बुधवार को सरकारी तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जिससे पूरे ऊर्जा सेक्टर में सकारात्मक माहौल बना रहा।

बाजार में आई तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेतों के कारण देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिसका लाभ घरेलू तेल कंपनियों को मिला।

दिन के कारोबार में Hindustan Petroleum Corporation Limited के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई और यह 410.50 रुपये के इंट्रा-डे हाई तक पहुंच गया। इसी तरह Bharat Petroleum Corporation Limited के शेयरों में भी 2.46 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई और यह 319.50 रुपये के स्तर तक पहुंच गया।

वहीं Indian Oil Corporation Limited के शेयर भी 1.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ 147.47 रुपये के उच्चतम स्तर पर कारोबार करते नजर आए। इन तीनों प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में आई तेजी ने ऊर्जा सेक्टर को मजबूती प्रदान की।

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट इस तेजी का प्रमुख कारण है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं और यह पिछले तीन महीनों के निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रही हैं। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता के संकेत मिले हैं। इस गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है, जिससे ईरान के तेल निर्यात में वृद्धि की संभावना बन सकती है।

इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने की संभावनाओं ने भी बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके सुचारू संचालन से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होती है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत का संकेत है क्योंकि इससे आयात बिल में कमी आती है और भुगतान संतुलन पर दबाव घटता है। इससे महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है और आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है।

इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली में कमी और रुपये की मजबूती भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है। इन दोनों कारकों से आने वाले समय में निवेश प्रवाह में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

ऊर्जा क्षेत्र में आई यह तेजी ऐसे समय पर आई है जब घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी और ऊर्जा कीमतों में नरमी से बाजार का समग्र माहौल सकारात्मक बना हुआ है।

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