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ओंकारेश्वर झूला पुल पर बढ़ा सुरक्षा संकट, लोडिंग तार की कड़ी टूटने के बाद आवागमन पूरी तरह बंद, तीन दिन तक जारी रह सकता है मरम्मत कार्य

 मध्य प्रदेश:  के खंडवा जिले स्थित ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में उस समय प्रशासनिक सतर्कता बढ़ गई जब ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण झूला पुल के लोडिंग तार की एक कड़ी क्षतिग्रस्त पाई गई। तकनीकी खराबी सामने आने के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा कदम उठाते हुए पुल पर सभी प्रकार की आवाजाही को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुल के दोनों ओर स्थित प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए गए हैं तथा किसी भी व्यक्ति को पुल पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

यह झूला पुल नर्मदा नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क माध्यम माना जाता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय नागरिक और पर्यटक इस पुल का उपयोग करते हैं। ऐसे में पुल के तार में आई तकनीकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए तत्काल प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पुल की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना उसे दोबारा चालू नहीं किया जाएगा।

घटना की जानकारी मिलते ही तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पुल का विस्तृत निरीक्षण शुरू कर दिया। प्रारंभिक जांच में लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने की पुष्टि हुई है। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और आवश्यक तकनीकी सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मरम्मत कार्य और सुरक्षा परीक्षण में लगभग तीन दिन का समय लग सकता है। इस दौरान पुल पूरी तरह बंद रहेगा।

प्रशासन ने पुल के दोनों छोर पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी कर दी है ताकि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्गों के उपयोग की सलाह दी गई है। नर्मदा नदी पार करने के लिए पुराने पुल तथा नाव सेवा का उपयोग किया जा सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना सभी के हित में है।

ओंकारेश्वर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। विशेष अवसरों और धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां आने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में झूला पुल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह दोनों धार्मिक स्थलों के बीच सुगम संपर्क उपलब्ध कराता है। पुल के अस्थायी रूप से बंद होने से यात्रियों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि नर्मदा नदी पर निर्मित यह झूला पुल वर्ष 2004 में लगभग 7.20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। पिछले दो दशकों में यह पुल ओंकारेश्वर और ममलेश्वर के बीच आवागमन का प्रमुख साधन बन चुका है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी पुल के एक तार में खराबी सामने आई थी, जिसके बाद आवश्यक मरम्मत कर इसे पुनः चालू किया गया था।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद पुल की व्यापक तकनीकी जांच की जाएगी। सभी सुरक्षा मानकों पर संतोषजनक रिपोर्ट मिलने के बाद ही इसे आम लोगों के लिए दोबारा खोला जाएगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता पुल की संरचनात्मक मजबूती सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित जोखिम को पूरी तरह समाप्त करना है।

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