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पुलिसकर्मियों के घायल होने के बावजूद नामजद कार्रवाई क्यों नहीं? इंदौर के चर्चित भूमि विवाद मामले में पुलिस की भूमिका पर बढ़ी जांच

मध्य प्रदेश: के इंदौर जिले में करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। कनाड़िया थाना क्षेत्र स्थित भूरी टेकरी की डायमंड कॉलोनी में कथित रूप से 500 करोड़ रुपये कीमत की जमीन को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब घटना के संबंध में दर्ज एफआईआर में आरोपियों को नामजद करने के बजाय अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया। इसके बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार विवादित भूमि पर तनाव की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। घटनास्थल पर दोनों पक्षों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। पुलिस के पहुंचने के बाद हालात नियंत्रित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति अचानक बिगड़ गई और कथित रूप से पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की घटना सामने आई। इस दौरान कुछ जवानों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

घटना के बाद पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया, लेकिन सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि एफआईआर में किसी भी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया। पुलिस द्वारा अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और पुलिसकर्मी स्वयं घटनाक्रम का हिस्सा थे, तब आरोपियों की पहचान दर्ज करने में कठिनाई क्यों आई।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पुलिस कमिश्नर ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेने के लिए कनाड़िया थाना प्रभारी को तलब किया। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी मांगी है और यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में किन परिस्थितियों को आधार बनाया गया। साथ ही मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।

घायल पुलिसकर्मियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान दो जवान घायल हुए थे। इनमें एक जवान के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई है। यदि ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी घायल हुए हैं तो उनके साथ हुई घटना की जिम्मेदारी तय करने और दोषियों की पहचान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।

विवादित भूमि को लेकर क्षेत्र में पहले से चर्चाएं होती रही हैं। लगभग 17 एकड़ क्षेत्र में फैली इस जमीन की कीमत करीब 500 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतने बड़े आर्थिक महत्व वाली संपत्ति को लेकर लंबे समय से विभिन्न दावे और विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में पुलिस हस्तक्षेप के दौरान हुई कथित मारपीट और उसके बाद दर्ज एफआईआर ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

प्रशासनिक और कानूनी हलकों में अब यह चर्चा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ क्या पुलिस आरोपियों की पहचान कर नामजद कार्रवाई करेगी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि घायल पुलिसकर्मियों से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रियता के बाद मामले की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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