Mahakaushal Times

नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज


नई दिल्ली ।उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पिछले चार दिनों से चला आ रहा तनावपूर्ण विवाद मंगलवार को भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसके बाद एक नए विवाद और जनआक्रोश की आशंका पैदा हो गई है। गुरुद्वारे में डटे निहंग सिखों को पंजाब से पहुंचे आठ सदस्यीय शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद वापस भेज दिया गया, लेकिन स्थानीय लोग इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कई दिनों तक क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, पत्थरबाजी और तनाव की घटनाएं हुईं, इसके बावजूद किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

मंगलवार सुबह से ही गुरुद्वारे में गतिविधियां तेज हो गई थीं। सुरक्षा कारणों से किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। पूर्वाह्न करीब साढ़े ग्यारह बजे पंजाब से आए धार्मिक प्रतिनिधियों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच बातचीत शुरू हुई। लगभग तीन घंटे तक चली चर्चा के बाद सहमति बनी और शाम करीब चार बजे पांचों निहंगों को सुरक्षा घेरे में पंजाब के लिए रवाना कर दिया गया। इस दौरान निहंग जयकारे लगाते और उत्साह जताते दिखाई दिए। कुछ निहंग मोटरसाइकिलों पर जबकि एक अन्य वाहन से रवाना हुआ।

आनंदपुर साहिब से पहुंचे जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने कहा कि सभी पक्ष शांति चाहते हैं और उत्तराखंड के लोग उनके भाई हैं। उन्होंने गुरुद्वारे पर कब्जे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निहंग अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके हुए थे। उनके अनुसार पुलिस कार्रवाई के भय से वे छत पर चले गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और प्रशासन जो भी उचित कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार होगी।

हालांकि स्थानीय लोगों का नजरिया इससे अलग है। उनका कहना है कि चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जे जैसी स्थिति बनी रही, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने सवाल उठाया कि जब पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात थे तो विवाद का समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। वहीं युवा नेता मोहित डिमरी ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि शांत माहौल को खराब करने की कोशिश हुई और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और धारदार हथियारों का प्रदर्शन भी हुआ। सोमवार रात को हाईवे पर पत्थरबाजी की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी थी। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि निहंगों को उकसाने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रतिक्रिया दी। इसके बावजूद लोगों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत और जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि गुरुद्वारा प्रबंधन ने तोड़फोड़ और अव्यवस्था के आरोप लगाए थे तो उनकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी।

अब स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तहरीर देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि चार दिनों तक चले घटनाक्रम में कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल प्रशासन राहत की सांस ले रहा है कि विवाद शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया, लेकिन क्षेत्र में लोगों की नाराजगी यह संकेत दे रही है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

MADHYA PRADESH WEATHER

आपके शहर की तथ्यपूर्ण खबरें अब आपके मोबाइल पर