बैठक के दौरान दिव्यांग समुदाय का नेतृत्व कर रहे राहुल शाह ने कलेक्टर को अपनी जिम्मेदारियों और कार्यों से अवगत कराया। उन्होंने अपने दस्तावेज और प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि उन्हें दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े मामलों में सहयोग और मार्गदर्शन के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिकृत किया गया है। राहुल शाह ने कहा कि उनका उद्देश्य देशभर के मूकबधिर और दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करना तथा उनकी समस्याओं को संबंधित संस्थाओं और न्यायिक मंचों तक पहुंचाना है। इसी उद्देश्य के तहत वे सिंगरौली के मूकबधिर समुदाय की आवाज बनकर कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं।
प्रतिनिधिमंडल की सबसे प्रमुख मांग जिले में बंद पड़े मूकबधिर बच्चों के विशेष विद्यालय को दोबारा शुरू करने की रही। राहुल शाह ने बताया कि पूर्व में संचालित यह विद्यालय कई कारणों से बंद हो गया था, जिससे जिले के दिव्यांग बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि विद्यालय के पुनः संचालन से सैकड़ों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर मिल सकेगा।
इसके अलावा दिव्यांगजनों ने जिले में संचालित औद्योगिक कंपनियों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड के माध्यम से कौशल विकास और स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम दिव्यांग युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बैठक में मौजूद अन्य दिव्यांगजनों ने रोजगार के अवसर बढ़ाने, विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने, बेरा टेस्ट की सुलभ सुविधा उपलब्ध कराने, साइन लैंग्वेज विशेषज्ञों की नियुक्ति करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के सीधे दिव्यांगजनों तक पहुंचाने की मांग की। साथ ही खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया गया ताकि दिव्यांग प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
कलेक्टर गौरव बैनल ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को इन पर आवश्यक परीक्षण और कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने दिव्यांगजनों की समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का भरोसा दिलाया।
कलेक्टर की ओर से मिले आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन जल्द ही विशेष विद्यालय के पुनः संचालन, रोजगार सृजन और अन्य सुविधाओं की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। इससे जिले के दिव्यांगजनों को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी के नए अवसर प्राप्त हो सकेंगे।