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Simhasth 2026 : सिंहस्थ के लिए शिप्रा घाटों के निर्माण का 60% काम पूरा, CM बोले- श्रद्धालुओं को नहीं होगी कोई असुविधा

cm mohan yadav meeting

Simhasth 2026 : भोपाल। मध्य प्रदेश में एक ओर सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को तेज किया जा रहा है, वहीं किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ से जुड़ी सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत, कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना का 66 प्रतिशत और शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर लंबे घाट निर्माण का 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

इसके साथ ही प्रदेश के 13 जिलों की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं भी पूरी हो चुकी हैं, जिनका अगले छह महीने में लोकार्पण किया जाएगा। इन परियोजनाओं से करीब 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

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13 जिलों की परियोजनाएं होंगी शुरू

मंत्रालय में आयोजित जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मंडला की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। सरकार इनका चरणबद्ध लोकार्पण करेगी। बैठक में निर्माणाधीन योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

केन-मंदाकिनी और सिंहस्थ परियोजनाओं पर जोर

बैठक में बताया गया कि केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। इससे 93,310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और 15.8 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा। वहीं सिंहस्थ से जुड़ी सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82 प्रतिशत और कान्ह डायवर्सन परियोजना का 66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शिप्रा नदी के घाटों का निर्माण भी तेजी से जारी है।

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सिंचित क्षेत्र बढ़ाने पर सरकार का फोकस

सरकार के अनुसार, वर्तमान और निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश का सिंचित क्षेत्र 95.45 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। स्वीकृत परियोजनाओं के पूर्ण होने पर यह आंकड़ा 108 लाख हेक्टेयर होने का अनुमान है।

वहीं केन-बेतवा परियोजना से बुंदेलखंड के 10 जिलों को सिंचाई और बिजली उत्पादन का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने स्लीमनाबाद टनल का कार्य जल्द पूरा कर उद्घाटन की तैयारी करने के निर्देश भी दिए। इस टनल से लगभग 1,500 गांवों की ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।

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