सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म के एक महत्वपूर्ण दृश्य को लेकर निर्देशक विशाल भारद्वाज की सोच बेहद अलग थी। उस सीन में एक लंबा संवाद था जिसे आईने के सामने फिल्माया जाना था। विशाल चाहते थे कि यह पूरा दृश्य बिना कपड़ों के शूट किया जाए ताकि किरदार की मानसिक स्थिति और असुरक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से दिखाया जा सके।
सैफ ने बताया कि निर्देशक का यह सुझाव उन्हें दिलचस्प तो लगा लेकिन सेट पर मौजूद बड़ी संख्या में लोगों की वजह से वह सहज महसूस नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने विशाल भारद्वाज के सामने एक मजेदार शर्त रख दी। सैफ ने कहा कि अगर निर्देशक भी उसी तरह बिना कपड़ों के उन्हें डायरेक्ट करेंगे तो वह यह सीन करने के लिए तैयार हैं। इस पर विशाल भारद्वाज ने मुस्कुराते हुए मना कर दिया और बात वहीं खत्म हो गई।
हालांकि अब जब सैफ उस पल को याद करते हैं तो उन्हें लगता है कि शायद उन्हें वह दृश्य कर लेना चाहिए था। उनके मुताबिक उस सीन को पीछे की ओर से फिल्माया जा सकता था और इससे किरदार की गंभीरता और प्रभाव दोनों बढ़ जाते। उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्मों में नए तरह के प्रयोग हो रहे हैं और अगर आज ऐसा प्रस्ताव मिलता तो शायद वह इसे स्वीकार कर लेते।
सैफ ने यह भी बताया कि शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले विशाल भारद्वाज ने उस पूरे दृश्य में बड़ा बदलाव कर दिया। पहले जहां लंबा संवाद रखा गया था वहीं बाद में निर्देशक ने तय किया कि इस दृश्य में कोई संवाद नहीं होगा। इसके बजाय सैफ को आईने के सामने खड़े होकर एक भारी धातु की वस्तु से शीशा तोड़ना था। इस दौरान उनके हाथ से खून बहता दिखाया जाना था ताकि किरदार के भीतर का गुस्सा और टूटन बिना शब्दों के दर्शकों तक पहुंच सके।
सैफ के अनुसार विशाल भारद्वाज की यही खासियत है कि वह अंतिम समय तक अपने दृश्यों पर काम करते रहते हैं और यदि उन्हें कोई बेहतर विचार आता है तो वह पूरी पटकथा में बदलाव करने से भी नहीं हिचकते। यही कारण है कि ओमकारा आज भी अपने दमदार निर्देशन बेहतरीन अभिनय और प्रभावशाली दृश्यों के लिए याद की जाती है।
ओमकारा ने न केवल सैफ अली खान के अभिनय करियर को नई पहचान दी बल्कि यह भी साबित किया कि चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने से कलाकार की प्रतिभा और निखरकर सामने आती है। फिल्म के 20 साल बाद सामने आया यह किस्सा दर्शाता है कि पर्दे पर दिखने वाले हर यादगार दृश्य के पीछे कई रोचक कहानियां छिपी होती हैं।