नई दिल्ली । बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और वहां की अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी और यहां तक कि हत्या का भी खतरा है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि यदि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना है तो वह अपनी मातृभूमि की धरती पर ही करना चाहेंगी।
शेख हसीना लंबे समय से भारत में रह रही हैं। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने भारत में शरण ली और तब से यहीं रह रही हैं। इस दौरान बांग्लादेश में उनके खिलाफ कई कानूनी कार्रवाइयां शुरू हुईं और राजनीतिक परिस्थितियां भी लगातार बदलती रहीं।
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे सभी अदालत की प्रक्रिया में शामिल होंगे और कानून के अनुसार अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे माहौल के बावजूद उन्होंने वापसी का निर्णय लिया है।
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा अंदेशा है कि स्वदेश लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि यदि जीवन का अंत होना ही है तो वह अपने देश की मिट्टी पर होना चाहिए, जहां उनके परिवार की यादें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश और न्यायिक व्यवस्था का सामना करना उनका कर्तव्य है।
बांग्लादेश की अदालत पहले ही वर्ष 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ मौत की सजा का फैसला सुना चुकी है। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री लगातार इन आरोपों को निराधार बताती रही हैं और उनका कहना है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। उनका दावा है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।
इस बीच बांग्लादेश की सरकार लगातार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करती रही है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी चर्चा होती रही है। भारत ने अब तक यह स्पष्ट किया है कि वह प्रत्यर्पण से जुड़े अनुरोधों की प्रक्रिया के अनुसार समीक्षा कर रहा है और दोनों देशों के बीच रचनात्मक संवाद बनाए रखने का पक्षधर है।
शेख हसीना ने यह भी कहा कि उनकी वापसी किसी बाहरी दबाव या किसी विदेशी सरकार की पहल का परिणाम नहीं होगी। उन्होंने दोहराया कि वह स्वयं अपने निर्णय के आधार पर बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के समक्ष उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगी। उनके इस ऐलान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि उनकी वापसी से देश के राजनीतिक समीकरणों और आगामी घटनाक्रम पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।