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भारत-अमेरिका ट्रेड डील में रूस का तेल नहीं बनेगा बाधा, सरकार ने दिया ये स्‍पष्‍ट जवाब


नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर रूस से तेल खरीद का मुद्दा चर्चा में है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या रूस से तेल की खरीद भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कोई पेच खड़ा कर सकती है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देशवासियों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात और बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना भारत की रणनीति का अहम हिस्सा है। मंत्रालय ने किसी भी तरह का सीधे-सीधे “हां” या “ना” वाला जवाब देने से परहेज़ किया। वाणिज्य मंत्रालय भी इस मामले में सवालों को विदेश मंत्रालय के पाले में डाल देता है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि इस विषय में जवाब विदेश मंत्रालय देगा। उन्होंने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का ब्योरा देते हुए बताया कि इसमें घरेलू उत्पादकों और कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपजों को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसमें मीट, पोल्ट्री, सोयामील, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी और मिलेट्स जैसी वस्तुएं शामिल हैं, ताकि किसानों और घरेलू उत्पादन पर कोई असर न पड़े।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत दंडात्मक आयात शुल्क हटा दिया है, जो रूस से कच्चे तेल की खरीद पर लगाया गया था। अमेरिका ने यह कदम भारत के प्रयासों और अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग विस्तार के फैसले के बाद उठाया। अमेरिका का कहना है कि भारत ने रूस से तेल के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात को बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है और वह अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों की खरीद करेगा।विदेश मंत्रालय ने बार-बार दोहराया कि भारत के सभी कदम ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए गए हैं और आगे भी इसी उद्देश्य के तहत रणनीति बनाई जाएगी।

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