Mahakaushal Times

शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार, 18 स्कूलों में बिना निर्माण करोड़ों का भुगतान, बीईओ सहित 22 आरोपी

मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में स्कूल निर्माण कार्यों में 4 करोड़ 37 लाख रुपये के बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि 18 स्कूलों में साइकिल स्टैंड पार्किंग और मरम्मत जैसे लघु निर्माण कार्यों के नाम पर राशि जारी कर दी गई लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं कराया गया। कागजों में काम पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया और पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए। मामले में तत्कालीन बीईओ 17 प्राचार्य 3 फर्म संचालकों और एक बाबू समेत कुल 22 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल से रामनगर की 22 स्कूलों के लिए निर्माण मद में राशि स्वीकृत हुई थी। संबंधित प्राचार्यों ने महाकाल ट्रेडर्स सतना रुद्र इंटरप्राइजेज मैहर और वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर भोपाल को वर्क ऑर्डर जारी किए। आरोप है कि बिना निर्माण कराए ही फर्मों को अग्रिम भुगतान कर दिया गया और कागजों में कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया।

घोटाले का खुलासा तब हुआ जब सुलखमा विद्यालय में बिना काम भुगतान की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुई। शिकायत के बाद कलेक्टर मैहर के निर्देश पर एसडीएम रामनगर शिव प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में जांच समिति गठित की गई। जांच में 18 स्कूलों में मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं पाया गया जबकि करोड़ों रुपये का भुगतान हो चुका था। इसे शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाला गंभीर अपराध माना गया।

एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी बीईओ राजेश द्विवेदी ने रामनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बीएनएस की धारा 316(2) 316(5) 61(2) और 318(2) के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों में महाकाल ट्रेडर्स के संचालक शुभम नायक रुद्र इंटरप्राइजेज के संचालक संजीव रजक और वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालक लकी को भी शामिल किया गया है।

जिन 18 स्कूलों में भुगतान हुआ उनमें शासकीय हाईस्कूल बडवार मनकहरी गोविंदपुर देवरा मोलहाई सुलखमा मड़वार समेत अन्य विद्यालय शामिल हैं। प्रत्येक विद्यालय को लगभग 22 से 28 लाख रुपये तक की राशि जारी की गई। जांच में पाया गया कि कहीं साइकिल स्टैंड नहीं बना तो कहीं मरम्मत कार्य का कोई चिन्ह तक नहीं मिला।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर रीवा और संयुक्त संचालक द्वारा संबंधित अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद रामनगर थाना पुलिस विस्तृत जांच में जुटी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।यह मामला शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिन स्कूलों में बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित होनी थीं वहां कागजों में निर्माण दिखाकर राशि निकाल ली गई। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और शासन की राशि की वसूली भी की जाएगी।

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