मोशन सिकनेस तब होती है जब आंखों, कानों और शरीर से मिलने वाले संकेत दिमाग तक अलग-अलग तरीके से पहुंचते हैं। यानी शरीर को स्थिर महसूस होता है, लेकिन आंखें चलती हुई चीजें देखती हैं। यही असंतुलन दिमाग को भ्रमित करता है और मतली, चक्कर या उल्टी जैसी समस्याएं पैदा करता है।
मोशन सिकनेस क्यों होती है?
हमारे कान के अंदर मौजूद बैलेंस सिस्टम, जिसे वेस्टिब्युलर सिस्टम कहते हैं, शरीर की गति को महसूस करता है। जब यह सिस्टम और आंखों से मिलने वाली जानकारी मेल नहीं खाती, तो दिमाग कन्फ्यूज हो जाता है। इसका असर मतली, उल्टी, पसीना और सिरदर्द के रूप में दिखता है। लंबी यात्रा, घुमावदार सड़कें और बंद वाहन इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।
मोशन सिकनेस से बचने के आसान उपाय
1. सही सीट का चुनाव करें
कार में आगे की सीट, बस में खिड़की के पास और फ्लाइट में विंग के पास वाली सीट अपेक्षाकृत स्थिर मानी जाती है। यहां बैठने से झटके कम महसूस होते हैं और चक्कर आने की संभावना घटती है।
2. हल्का और संतुलित भोजन करें
सफर से पहले तला-भुना या भारी भोजन करने से बचें। हल्का और सुपाच्य भोजन करें और बहुत ज्यादा खाली पेट भी न रहें। अदरक की चाय, नींबू पानी या हल्का स्नैक मोशन सिकनेस को कम करने में मदद कर सकते हैं।
3. नजरें स्थिर रखें
चलती गाड़ी में मोबाइल या किताब पढ़ना मोशन सिकनेस को बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि दूर किसी स्थिर बिंदु को देखें या आंखें बंद करके आराम करें।
4. ताजी हवा और हाइड्रेशन
वाहन में ताजी हवा का इंतजाम रखें। खिड़की खोलें या एयर वेंट को अपनी ओर रखें। साथ ही पानी की छोटी-छोटी घूंट लेते रहें। यह शरीर को डिहाइड्रेट होने से बचाएगा और उलझन कम करेगा।
5. दवाइयों का सहारा
अगर समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर एंटी-नॉशिया या एंटीहिस्टामिन दवाएं ली जा सकती हैं। इन्हें सफर शुरू होने से पहले लेना ज्यादा असरदार होता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दवा लेने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।
मोशन सिकनेस को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन सही तैयारी और सावधानी अपनाकर इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव, जैसे सही सीट पर बैठना, हल्का भोजन करना, नजरें स्थिर रखना और पर्याप्त हाइड्रेशन, सफर को आरामदायक और मज़ेदार बना सकते हैं।