जांच के अनुसार, जबलपुर में एक निजी अस्पताल में टीम लीडर के पद पर कार्यरत रतन शर्मा की शादी राधा उर्फ दीक्षा नाम की महिला से कराई गई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद दुल्हन की संदिग्ध गतिविधियों ने पूरे मामले को मोड़ दिया।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब रतन शर्मा को पता चला कि जिसे दुल्हन का “मुंहबोला भाई” बताया गया था, वह असल में उसका पति अजय चौहान है। यही नहीं, पूरी शादी एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसे पहली पत्नी से जुड़े विवाद को छिपाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए रचा गया था।
दरअसल, आरोपी अजय चौहान की पहली शादी 2009 में हुई थी, जिससे उसके बच्चे भी हैं। बाद में उसने दूसरी शादी राधा उर्फ दीक्षा से आगरा के आर्य समाज मंदिर में कर ली थी। जब पहली पत्नी को इस दूसरी शादी की जानकारी मिली, तो उसने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसी डर से पूरी साजिश तैयार की गई।
योजना के तहत दीक्षा की शादी किसी अन्य युवक से कराई गई, ताकि पहली पत्नी को भ्रमित किया जा सके और मामला शांत दिखाया जा सके। इसी कड़ी में रतन शर्मा को निशाना बनाया गया, जिनसे शादी के नाम पर लाखों रुपये भी वसूले गए।
शादी के बाद रतन को पत्नी के व्यवहार पर शक हुआ। वह मोबाइल पर छिपकर बातचीत करती थी, जिससे संदेह और गहरा गया। बाद में जब रतन ने मोबाइल की चैट चेक की, तो उसमें पति-पत्नी जैसी बातचीत सामने आई, जिससे पूरा राज खुल गया।
इसके बाद रतन ने अगले तीन दिनों तक दुल्हन की गतिविधियों पर नजर रखी और पर्याप्त सबूत इकट्ठा कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि शादी से पहले परिवार ने खुद को गरीब और अनाथ बताकर सहानुभूति हासिल की थी और शादी में भारी खर्च भी करवाया गया।
आरोप है कि भविष्य में दहेज और घरेलू हिंसा का झूठा केस दर्ज कर और रकम वसूलने की योजना भी बनाई गई थी। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अजय चौहान और उसकी पत्नी दीक्षा को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पांच अन्य आरोपी फरार हैं।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या यह गिरोह पहले भी इस तरह की ठगी की घटनाओं में शामिल रहा है। Gwalior में सामने आया यह मामला एक बार फिर “लुटेरी दुल्हन” गैंग के नए तरीके को उजागर करता है, जहां रिश्तों का इस्तेमाल आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है।