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सूरत की ज्वेलरी फैक्ट्री में हादसा: ठेका मजदूरों की सुरक्षा लापरवाही ने ली चार जिंदगियों की जान

नई दिल्ली । गुजरात के सूरत शहर से औद्योगिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। वराछा क्षेत्र स्थित एक ज्वेलरी फैक्ट्री के ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से चार मजदूरों की मौत हो गई। यह हादसा स्थानीय प्रशासन और उद्योग सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चेतावनी का संकेत है।

घटना शनिवार सुबह हुई, जब एक सुपरवाइजर समेत चार श्रमिक टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे। टैंक में मौजूद जहरीली गैस के कारण वे बेहोश हो गए और टैंक के भीतर गिर पड़े। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी को बाहर निकाला। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित किया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन न करने की जानकारी सामने आई है। मजदूरों ने कोई सुरक्षा उपकरण नहीं पहना था और टैंक में प्रवेश से पहले गैस जांच या अन्य आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। इस लापरवाही ने हादसे को और गंभीर बना दिया।

फायर विभाग ने बताया कि ज्वेलरी फैक्ट्री में सोने और अन्य गहनों की प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाले रसायनों का निस्तारण ईटीपी प्लांट में किया जाता है। सफाई के लिए बुलाए गए ठेका श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा साधन उपलब्ध नहीं कराए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद टैंकों और गैसयुक्त स्थानों में काम करने से पहले प्रशिक्षित निगरानी और ऑक्सीजन स्तर की जांच अनिवार्य होनी चाहिए।

पुलिस ने दुर्घटना को लेकर मृतकों के नाम से मामला दर्ज कर लिया है और यह पता लगाया जा रहा है कि किसकी लापरवाही से यह हादसा हुआ। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने फैक्ट्री मालिकों और ठेकेदारों से सुरक्षा नियमों के पालन की रिपोर्ट तलब की है।

सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों में नियमित प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। ईटीपी टैंकों की सफाई जैसी जोखिमपूर्ण गतिविधियों में प्रवेश करने वाले श्रमिकों के लिए मास्क, गैस सेंसर और पर्याप्त वेंटिलेशन जैसी सुविधाएं जरूरी हैं।

इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए कंपनियों को कर्मचारी सुरक्षा, पर्यावरणीय मानक और निगरानी प्रक्रियाओं को कड़ाई से लागू करना होगा।

सूरत हादसा केवल चार मजदूरों की जान लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा प्रबंधन की कमजोरी का एक बड़ा उदाहरण भी है। प्रशासन और उद्योग जगत के लिए यह चेतावनी है कि सुरक्षा प्रक्रियाओं की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है।

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