मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को तलब किया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिप्रा नदी के 200 मीटर दायरे में हुए सभी अवैध निर्माणों की जानकारी प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि इन्हें हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने नगर निगम को 15 जून तक विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नदी तट के आसपास बनाए गए होटल, रिसॉर्ट और अन्य निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे शिप्रा में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि जिन क्षेत्रों को पर्यावरणीय और धार्मिक दृष्टि से संरक्षित माना गया है, वहां निर्माण गतिविधियां लगातार जारी हैं। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि नदी तट के समीप किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या निर्माण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता बलदीप सिंह गांधी ने कोर्ट को बताया कि नदी किनारे 100 से 200 मीटर की सीमा के भीतर 200 से अधिक अवैध निर्माण मौजूद हैं। इनमें कई ऐसे निर्माण भी हैं, जो बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
कोर्ट ने नगर निगम को निर्देशित किया है कि 15 जून तक सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार कर कार्रवाई शुरू की जाए। साथ ही तब तक इन अवैध निर्माणों में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं होने देने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने नदी निधि विकास योजना से संबंधित रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। माना जा रहा है कि यदि नगर निगम संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर पाया तो हाईकोर्ट और सख्त कदम उठा सकता है। शिप्रा नदी को बचाने और सिंहस्थ क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखने को लेकर यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।