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कटनी में दुर्लभ कछुओं के गायब होने से हड़कंप, जांच में जुटा प्रशासन


मध्य प्रदेश । Katni में ऐतिहासिक लल्लू भैया की तलैया के गहरीकरण कार्य के दौरान सामने आई एक घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रविवार को खुदाई के दौरान तीन दुर्लभ प्रजाति के कछुए पाए गए थे, जिन्हें तत्काल मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने एक तसले में सुरक्षित रखा था। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कछुओं को जीवित अवस्था में संभालते हुए देखा जा सकता है।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया। कुछ ही समय में ये तीनों दुर्लभ कछुए अचानक लापता हो गए। न तो उनका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है और न ही यह स्पष्ट जानकारी कि उन्हें वन विभाग को सौंपा गया या कहीं और ले जाया गया। इस घटना के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रजाति के जीवों के साथ इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। आशंका जताई जा रही है कि या तो इन कछुओं को अनजाने में कहीं छोड़ दिया गया या फिर उनकी अवैध तस्करी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह घटना सीधे तौर पर वन्यजीव संरक्षण नियमों की अनदेखी को दर्शाती है।

Katni में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कछुओं को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है। कानून के अनुसार किसी भी जंगली कछुए को नुकसान पहुंचाना, उसे गायब करना या अवैध रूप से अपने पास रखना एक गंभीर अपराध है, जिसमें 3 से 7 वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

नियमों के मुताबिक, यदि किसी भी निर्माण या रिहायशी क्षेत्र में कोई वन्यजीव मिलता है, तो उसकी तुरंत सूचना वन विभाग को देना और सुरक्षित रूप से उन्हें सौंपना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं होने से नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने स्वीकार किया है कि तलैया की खुदाई के दौरान कछुए मिले थे, लेकिन फिलहाल वे कहां हैं, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं मानी जा रही, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर करती है। अब सवाल यह है कि आखिर ये दुर्लभ कछुए गए कहां और इसके पीछे जिम्मेदार कौन है।

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